ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों ने कोयला एवं गैस निर्यात के कारण मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया

सिडनी, 23 जून (वार्ता) ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों के एक समूह ने अपनी ही सरकार पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से कार्रवाई की गुहार लगाई है। समूह का आरोप है कि कोयला और गैस का निर्यात जारी रखने के कारण देश में पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ऑस्ट्रेलिया में लगातार आ रही भीषण बाढ़, जंगलों की आग, लू और समुद्र के बढ़ते जलस्तर जैसी आपदाओं के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं, जो जीवाश्म ईंधन कंपनियों को बढ़ावा दे रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) द्वारा वर्ष 2025 में दिए गए उस ऐतिहासिक फैसले के बाद यह पहला मामला है, जिसमें कहा गया था कि जलवायु परिवर्तन के नुकसान को लेकर सरकारों पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

इस मामले में शामिल डॉ. बैरी ट्रेल ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने खुद जंगलों की भीषण आग का सामना किया है। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की बात नहीं रह गया है, बल्कि यह आज लोगों की जान ले रहा है और बस्तियों को तबाह कर रहा है। ऐसे में कोयला और गैस कंपनियों को प्रदूषण बढ़ाने की छूट देना सरकार की बड़ी लापरवाही है। इसी तरह एक अन्य नागरिक ने बताया कि वर्ष 2022 की बाढ़ के दौरान वह 10 दिनों तक अपने घर में कैद रहे क्योंकि बिजली कटने से लिफ्ट और निकास द्वार बंद हो गए थे।

उन्होंने कहा कि दृष्टिहीन होने के कारण ऐसी आपदाएं उनके जैसे लोगों के लिए रोजमर्रा के जीवन को और भी अधिक असुरक्षित बना देती हैं। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की एक आदिवासी महिला प्रोफेसर ने भी इस शिकायत में अपना पक्ष रखा है। विनाशकारी बाढ़ के कारण उन्हें फिट्ज़रॉय नदी के पास स्थित अपने इलाके से हटना पड़ा था। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि पर्यावरण को होने वाले नुकसान से उनकी पूरी संस्कृति और पीढ़ियों पुराना पारंपरिक ज्ञान खत्म हो रहा है, जो कि लिखित में नहीं बल्कि इस धरती से जुड़ा हुआ है। समूह की कानूनी मदद कर रही संस्था ‘एनवायरनमेंटल जस्टिस ऑस्ट्रेलिया’ की वरिष्ठ वकील हन्ना व्हाइट ने स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया के कोयले और गैस से पूरी दुनिया को नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि समूह ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति से मांग की है कि बिना किसी सुरक्षा योजना के कोयला और गैस के निर्यात को मंजूरी देना तथा कंपनियों को सब्सिडी देना गैरकानूनी घोषित किया जाए।

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