नयी दिल्ली, 18 जून (वार्ता) दिल्ली पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच नवजात बच्चों को सुरक्षित बचाया और 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस मामले की जांच तब शुरू हुई, जब एक महिला के बारे में पुख्ता जानकारी मिली। उस महिला को पहले एक नवजात बच्चे के साथ देखा गया था, जो बाद में गायब हो गया। जानकारी देने वाले ने बताया कि करीब 20 दिन बाद उसी महिला को फिर एक दूसरे नवजात बच्चे के साथ देखा गया, जिससे बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह पर शक गहरा गया।
मध्य दिल्ली के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि पुलिस दलों ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और सुराग जुटाये, जिससे संदिग्ध महिला की पहचान ज्योति उर्फ कमलेश के रूप में हुई। पुलिस ने महिला को पकड़ने के लिए जाल बिछाया, जिसमें पुलिसकर्मी खुद बच्चा खरीदने वाले ग्राहक बनकर महिला के पास पहुंचे। बातचीत के दौरान आरोपी महिला ने एक नवजात बच्चे के लिए 20,000 रुपये की मांग की। सौदा पांच जून के लिए तय हुआ और यह बच्चा महज चार से पांच दिन का था।
पुलिस ने ज्योति को उसके दो साथियों के साथ धर दबोचा और बाल तस्करी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने एक बड़े गिरोह से जुड़े होने का खुलासा किया, जिसमें कई लोग शामिल थे।
जांच के दौरान पुलिस दल बेगमपुर पहुंचे, जहां हीरा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल चलाने वाले एक डॉक्टर विवेकी की भूमिका सामने आयी। पुलिस का आरोप है कि इस अस्पताल का इस्तेमाल नवजात बच्चों की तस्करी के केंद्र के रूप में किया जा रहा था, जहां उन दंपतियों से सौदे किये जाते थे जो माता-पिता नहीं बन पा रहे थे।
अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह लड़कियों को लगभग एक लाख रुपये और लड़कों को करीब दो लाख रुपये में बेचता था। माना जा रहा है कि डॉक्टर ही इस पूरे अवैध धंधे का मुख्य साजिशकर्ता है, जो इन सौदों को करवाता था।
इस मामले में एक और आरोपी सबा भाई उर्फ कालिया को गुजरात से गिरफ्तार किया गया है, जो उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को थोड़े से पैसों का लालच देकर उनके बच्चे ले आता था। शक है कि उसने पिछले कुछ वर्षों में 30 से अधिक बच्चों की तस्करी की है।
पुलिस ने इस पूरी कार्रवाई के दौरान 2.25 लाख रुपये नकद भी बरामद किये हैं। बचाये गये बच्चों को सुरक्षित देखरेख में भेज दिया गया है, जबकि पुलिस अब उन परिवारों का पता लगाने में जुटी है, जिन्होंने मध्य प्रदेश सहित अलग-अलग राज्यों से इन बच्चों को अवैध रूप से खरीदा था।
