
जबलपुर । मप्र हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में नियमों को ताक पर रखकर दागी अधिकारियों को बड़ा प्रभार सौंपने की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है । न्यायालय ने भोपाल ब्रिज जोन के मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) के पद से जुड़े एक विवादित प्रशासनिक आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है । जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने कहा कि पीडब्ल्यूडी के जिस दफ्तर को दागी अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसी दफ्तर की कमान उसे सौंप दी गई। यह प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग है। पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे भोपाल ब्रिज जोन के मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार किसी ऐसे योग्य अधिकारी को सौंपें जिसका सेवा रिकॉर्ड पूरी तरह निष्कलंक हो और जो पदोन्नति की पात्रता श्रेणी में आता हो। राज्य के मुख्य सचिव और पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव को आवश्यक अनुपालन और भविष्य में ऐसी गड़बडिय़ों को रोकने के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं।
यह है मामला-
मामला पीडब्ल्यूडी के प्रभारी मुख्य अभियंता पीसी वर्मा से जुड़ा है। उन्हें जुलाई 2025 में मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी ब्रिज जोन भोपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। इसके बाद 29 अप्रैल 2026 को विभाग ने उन्हें निविदा मूल्यांकन में कथित अनियमितताओं को लेकर एक कारण बताओ नोटिस जारी किया। हैरान करने वाली बात यह रही कि इस नोटिस के जारी होने के महज तीन घंटे के भीतर ही विभाग ने एक नया आदेश जारी कर पीसी वर्मा से अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया। यही नहीं, यह प्रभार भोपाल जोन के मुख्य अभियंता का कार्यभार संभाल रहे एक अन्य अधिकारी को सौंप दिया गया, जिनके खिलाफ पहले से ही गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और पुल ढहने के मामलों में जांच लंबित है। विभाग के इसी आदेश को पीसी वर्मा ने हाईकोर्ट में संजय कुमार मस्के के प्रभार को चुनौती दी। न्यायालय ने मामले की सुनवाई दौरान राज्य सरकार की इस कार्रवाई को पूर्वाग्रह से ग्रसित और दुर्भावनापूर्ण माना। न्यायालय ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि जिस अधिकारी को नया प्रभार सौंपा गया, उसके खिलाफ सिवनी में वैनगंगा नदी पर बने सबमर्सिबल पुल के ढहने और ग्वालियर में 1000 बिस्तर के अस्पताल प्रोजेक्ट में करीब 2.41 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय गबन के गंभीर आरोप हैं। न्यायालय ने पीडब्ल्यूडी के भर्ती व सेवा नियम 1983 का हवाला देते हुए इस बात पर भी चिंता जताई कि जोन ऑफ कंसीडरेशन से बाहर के जूनियर अधिकारियों को पिछले दरवाजे से उच्च पदों के प्रभार बांटे जा रहे हैं, जिससे विभाग का पूरा प्रशासनिक ढांचा और वरिष्ठता क्रम प्रभावित हो रहा है।
