नई दिल्ली | परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2019 से 31 जनवरी 2026 के बीच आयातित परमाणु उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह माफ कर दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी इस ‘रेट्रोस्पेक्टिव’ आदेश का लाभ मुख्य रूप से न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) को मिलेगा, जिससे परमाणु परियोजनाओं की लागत कम होगी और बिजली उत्पादन को गति मिलेगी।
ग्रीन एनर्जी और बायोफ्यूल पर जोर
सरकार ने परमाणु ऊर्जा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। अब 22 से 30 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E22-E30) पर उत्पाद शुल्क पूरी तरह हटा दिया गया है। इस निर्णय से देश में बायोफ्यूल के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे न केवल विदेशी तेल पर निर्भरता घटेगी, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
भविष्य के लक्ष्यों की ओर कदम
भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का है। एलएंडटी (L&T) और भेल (BHEL) जैसी कंपनियों के लिए यह कर राहत एक बड़ी सौगात है, जो रिएक्टर निर्माण में योगदान दे रही हैं। इन दोनों महत्वपूर्ण फैसलों से यह स्पष्ट है कि भारत तेजी से ‘क्लीन और ग्रीन एनर्जी’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, जो भविष्य में सस्ती और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा प्रदान करेगा।

