भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश में उर्वरकों के वितरण और बिक्री में कथित अनियमितताओं पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि किसानों को डीएपी, एसएसपी तथा विभिन्न कॉम्प्लेक्स उर्वरक मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दरों पर बेचे जा रहे हैं और इसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से किसानों और किसान संगठनों ने शिकायत की है कि सहकारी समितियां, विपणन एजेंसियां तथा निजी विक्रेता निर्धारित एमआरपी से अधिक कीमत वसूल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कम कीमत पर खरीदे गए पुराने स्टॉक को भी पीओएस और ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से नई तथा काफी अधिक दरों पर बेचा जा रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि 20:20:0:13 ग्रेड के 50 किलोग्राम उर्वरक का एक बैग, जिसकी कीमत पहले लगभग 1,450 रुपये थी, कुछ क्षेत्रों में 2,100 रुपये तक बेचा जा रहा है। इससे किसानों पर प्रति बैग लगभग 650 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसी प्रकार की शिकायतें एसएसपी और अन्य उर्वरकों की बिक्री को लेकर भी सामने आई हैं।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह मामला केवल मूल्य वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों, पारदर्शिता तथा उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के संभावित उल्लंघन से भी जुड़ा है। उन्होंने प्रदेशव्यापी जांच, पुराने स्टॉक को नई दरों पर बेचने संबंधी शिकायतों की जिला स्तर पर पड़ताल, प्रभावित किसानों को राशि वापस दिलाने तथा दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि किसान प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाओं तथा बाजार की अनिश्चितताओं के बीच उनके हितों की रक्षा के लिए सरकार को शीघ्र और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
