नयी दिल्ली, 04 जून (वार्ता) केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने गुरुवार को कहा कि किसी भी देश का सामान कितना प्रतिस्पर्धी है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उसका विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र कितना मजबूत है।
फिक्की-बीआईएस द्वारा आयोजित “वैश्विक विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए गुणवत्ता प्रणालियां” विषय पर यहां आयोजित सम्मेलन में उन्होंने कहा कि गुणवत्ता केवल विनिर्माण का उद्देश्य नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं के विश्वास की आधारशिला है।
उन्होंने कहा, “इंडस्ट्री 4.0, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), उन्नत स्वचालन, स्मार्ट सप्लाई चेन और डेटा-आधारित उत्पादन प्रणालियों के इस युग में किसी भी राष्ट्र की प्रतिस्पर्धात्मकता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कितना मजबूत और भविष्य के लिए तैयार विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर सकता है।”
सुश्री खरे ने कहा कि केवल आत्मकेंद्रित दृष्टिकोण अपनाकर कोई भी राष्ट्र दीर्घकालिक प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, “अगले 25 साल में हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि भारत वैश्विक बाजारों के लिए गुणवत्ता का अग्रणी देश कैसे बन सकता है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया 2.0’ की परिकल्पना के तहत भारत वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में हमारा विनिर्माण क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।”
देश में परीक्षण केंद्रों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार कारोबार करने की आसानी को बढ़ावा देने और विभिन्न कानूनों के अपराधीकरण को समाप्त करने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि निजी क्षेत्र अपने क्लस्टर-आधारित परीक्षण अवसंरचना स्थापित कर सकें। उन्होंने कहा, “वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को उपभोक्ता-केंद्रित होना चाहिये। हमने पुरानी परीक्षण विधियों की जगह तेज, अधिक सटीक और विस्तार योग्य परीक्षण प्रक्रिया अपनाने के लिए कई कदम उठाये हैं।”
प्रौद्योगिकी को महत्वपूर्ण बताते हुए सुश्री खरे ने कहा कि उपभोक्ता मामले विभाग का ई-जागृति पोर्टल उपभोक्ता शिकायत निवारण में अत्यंत सफल रहा है। इस पोर्टल के माध्यम से संबंधित पक्ष ऑनलाइन मुकदमों में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस पोर्टल के जरिये 3,500 से अधिक प्रवासी भारतीयों के मामलों का समाधान किया जा रहा है।
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के महानिदेशक संजय गर्ग ने कहा कि आज की परस्पर जुड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था में गुणवत्ता केवल प्रतिस्पर्धात्मक लाभ नहीं, बल्कि अस्तित्व और विकास के लिए अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने गुणवत्ता और मानकों के प्रति उपभोक्ताओं में अधिक जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने बताया कि बीआईएस ने अब तक 24,000 से अधिक मानक प्रकाशित किये हैं, जिनमें लगभग 11,000 उत्पाद मानक हैं और शेष परीक्षण एवं अन्य मानक हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 1,500 उत्पाद मानक प्रमाणन के अंतर्गत हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में 700 से अधिक उत्पाद गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के अंतर्गत आते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि जहां भी अंतर्राष्ट्रीय मानक उपलब्ध हैं, वहां भारतीय मानकों का लगभग 94 प्रतिशत वैश्विक मानकों के अनुरूप है और अधिक से अधिक मानकों को वैश्विक मानकों से जोड़ने के प्रयास किये जा रहे हैं।
फिक्की मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस कमेटी के अध्यक्ष तथा एनएबीसीबी के पूर्व अध्यक्ष और जुबिलेंट लाइफ साइंसेज लिमिटेड के पूर्व कार्यकारी निदेशक श्याम बंग ने कहा कि पिछले दशक में गुणवत्ता प्रणालियों का सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन अनुपालन-आधारित ढांचे से आगे बढ़कर ऐसे उद्यम-व्यापी सिस्टम में हुआ है जो रणनीति, संचालन, ग्राहक अनुभव, जोखिम प्रबंधन और निरंतर सुधार को प्रभावित करते हैं।
फिक्की की महानिदेशक ज्योति विज ने कहा, “भविष्य में संगठनों की सफलता उनकी निरंतरता, विश्वसनीयता, अनुपालन और सतत सुधार प्रदान करने की क्षमता पर अधिक निर्भर करेगी। इसलिए मजबूत गुणवत्ता प्रणालियां, वैश्विक स्तर पर मान्य मानकों और परिचालन उत्कृष्टता द्वारा समर्थित होकर, लचीले, भविष्य-उन्मुख और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण संस्थानों के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।”
कार्यक्रम के दौरान ’11वें फिक्की क्वालिटी सिस्टम्स उत्कृष्टता पुरस्कार’ की घोषणा की गयी तथा संबंधित हैंडबुक का विमोचन भी किया गया।
