नयी दिल्ली, 04 जून (वार्ता) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कृषि रसायनों और जनसुरक्षा से जुड़े मामलों में नियामकीय मानकों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता पर जोर देते हुए दिल्ली स्थित कंपनी क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड (सीसीपीएल) को हर्बीसाइड हैलोसल्फ्यूरॉन मिथाइल के आयात और निर्माण के लिए दिया गया पंजीकरण रद्द कर दिया है। यह रसायन गन्ना और मक्का जैसी फसलों में खरपतवार नियंत्रण के लिए उपयोग किया जाता है।न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं। सीसीपीएल को 2011 में सिंगापुर की कंपनी फर्टीएग्रो द्वारा निर्मित और आपूर्ति किये गये नमूनों के आयात की अनुमति मिली थी। बाद में कंपनी ने 2016 में चीन की जियांग्सू एग्रोकेमिकल्स द्वारा निर्मित तथा हेबेई बेस्टार द्वारा आपूर्ति किये जाने वाले हैलोसल्फ्यूरॉन मिथाइल 98 प्रतिशत के आयात के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र का आवेदन किया।
उच्च न्यायालय ने पाया कि पंजीकरण समिति ने यह प्रमाणपत्र उस स्थिति में जारी कर दिया, जबकि यह दर्शाने वाला कोई ठोस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था कि जियांग्सू एग्रोकेमिकल्स को 2011 में इस उत्पाद के निर्माण की अनुमति प्राप्त थी। न्यायालय ने उल्लेख किया कि उक्त कंपनी को हैलोसल्फ्यूरॉन मिथाइल 98 प्रतिशत के निर्माण के लिए अस्थायी पंजीकरण अक्टूबर 2018 में मिला था। न्यायालय ने कहा कि कीटनाशक अधिनियम की धारा 9(3) के तहत पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करना स्पष्ट रूप से अवैध था।
उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद सीसीपीएल अब हैलोसल्फ्यूरॉन मिथाइल 98 प्रतिशत का आयात या हैलोसल्फ्यूरॉन मिथाइल 75 प्रतिशत डब्ल्यूजी का घरेलू निर्माण नहीं कर सकेगी। न्यायालय ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि बिना परीक्षण या अनधिकृत निर्माता से प्राप्त कीटनाशकों और कृषि रसायनों के आयात एवं उपयोग से मानव और पशु जीवन के साथ-साथ पर्यावरण पर भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में नियामकीय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाना आवश्यक है। यह आदेश धनुका एग्रीटेक लिमिटेड द्वारा दायर लेटर्स पेटेंट अपील पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया। कंपनी की ओर से उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड शोभा राममूर्ति ने पक्ष रखा।

