आकार ले रहा 8 हजार करोड़ का औद्योगिक भविष्य

उज्जैन: धार्मिक पर्यटन और आस्था की पहचान रखने वाला उज्जैन अब औद्योगिक मानचित्र पर भी तेजी से उभर रहा है. महाकाल लोक, सिंहस्थ-2028 और बड़े आधारभूत विकास कार्यों के बीच विक्रम उद्योगपुरी ऐसा प्रोजेक्ट बनकर सामने आया है, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन के आर्थिक भविष्य की धुरी के रूप में देख रहे हैं. अब केंद्र सरकार की मल्टी प्रोडक्ट सुपर इंडस्टि्रयल पार्क योजना में भी विक्रम उद्योगपुरी का नाम प्रमुखता से आगे बढ़ाया गया है.

विक्रम उद्योगपुरी केवल एक औद्योगिक क्षेत्र नहीं, बल्कि उज्जैन को रोजगार, निवेश और निर्यात का नया केंद्र बनाने की महत्वाकांक्षी योजना है. वर्तमान में पहले चरण में दर्जनों उद्योगों को भूमि आवंटित की जा चुकी है और कई इकाइयों ने उत्पादन भी शुरू कर दिया है. उपलब्ध औद्योगिक भूखंड लगभग भर चुके हैं, जिसके चलते दूसरे चरण का विस्तार तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है.

67 उद्योगों को दी जमीन
एमपीआईडीसी के अनुसार पहले चरण में 67 उद्योगों को भूमि आवंटित की गई है, जिनमें 20 के करीब इकाइयां उत्पादन शुरू कर चुकी हैं. इन उद्योगों में खाद्य प्रसंस्करण, फार्मा, इंजीनियरिंग, मेडिकल डिवाइस, पाइप निर्माण और ऑटोमोबाइल क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं. कुल निवेश 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है.

दूसरे चरण में 400 हेक्टेयर
उद्योगों की बढ़ती मांग को देखते हुए विक्रम उद्योगपुरी का दूसरा चरण विकसित किया जा रहा है. एमपीआईडीसी ने 400 हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त भूमि अधिग्रहित कर विस्तार की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अधिकारियों का दावा है कि वर्तमान में लगभग 35 नई कंपनियां 800 एकड़ भूमि की मांग कर रही हैं और इनके माध्यम से 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं.

विदेशी कंपनियां भी आई
विक्रम उद्योगपुरी में जिन प्रमुख कंपनियों ने रुचि दिखाई है या निवेश प्रस्ताव दिए हैं, उनमें पेप्सिको, अमूल, आशीर्वाद पाइप्स, कर्नाटक एंटीबायोटिक्स, श्रीनिवास फार्मा, यशोदा लिनेन और अन्य राष्ट्रीय स्तर की कंपनियां शामिल हैं. हाल के वर्षों में अमेरिकी और यूरोपीय तकनीक से जुड़े उद्योगों ने भी मेडिकल डिवाइस और ऑटोमोबाइल सेक्टर में रुचि दिखाई है.

580 करोड़ का होगा निवेश
ऑटोमोबाइल सेक्टर में सबसे बड़ा आकर्षण वोल्वो-आइशर समूह का निवेश माना जा रहा है. कंपनी ने विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में लगभग 580 करोड़ रुपये के निवेश से बस, ट्रक और ऑटोमोबाइल कंपोनेंट निर्माण इकाई स्थापित करने की घोषणा की है. इससे स्थानीय स्तर पर हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है.

निदेशक से चर्चा
एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर ने नवभारत से कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मंशानुसार विक्रम उद्योगपुरी अब मध्य भारत के सबसे आकर्षक औद्योगिक गंतव्यों में शामिल हो चुका है. पहले चरण के लगभग सभी भूखंड आवंटित हो चुके हैं और लगातार नए निवेश प्रस्ताव मिल रहे हैं. इसी कारण फेज-2 विकसित किया जा रहा है ताकि बड़ी कंपनियों को बेहतर आधारभूत सुविधाओं के साथ भूमि उपलब्ध कराई जा सके.

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