टीईटी परीक्षा के विरोध में पिपलोदा से मंदसौर तक 80 किमी नंगे पैर चले शिक्षक गणेश मालवीय, सांसद गुप्ता को सौंपा ज्ञापन

मंदसौर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2017 के संशोधन के तहत पुराने शिक्षकों पर थोपी जा रही टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) के विरोध में देशव्यापी रोष पनप रहा है। इसी क्रम में रतलाम जिले के पिपलोदा से शिक्षक साथी श्री गणेश मालवीय 80 किलोमीटर की दूरी नंगे पैर पैदल तय कर भगवान श्री पशुपतिनाथ की नगरी मंदसौर पहुंचे। 31 मई को प्रातः 6 बजे पिपलोदा से रवाना होकर 1 जून को दोपहर 4 बजे मंदसौर पहुंचने तक उनके पैरों में गंभीर छाले और असहनीय पीड़ा हो गई थी, लेकिन देश के 25 लाख शिक्षकों के हक की लड़ाई के लिए उनका मनोबल कम नहीं हुआ। रास्ते में दलोदा से अध्यापक साथी भंवर सिंह परिहार भी नंगे पैर उनके साथ इस यात्रा में शामिल हुए। मंदसौर पहुंचने पर दोनों शिक्षकों ने भगवान श्री पशुपतिनाथ जी के दर्शन कर टीईटी परीक्षा से मुक्ति की प्रार्थना की। इस दौरान अध्यापक शिक्षक संयुक्त संघर्ष मोर्चा जिला मंदसौर द्वारा ग्राम कचनारा, दलोदा, फतेहगढ़ और नया खेड़ा सहित विभिन्न स्थानों पर उनका जोरदार स्वागत किया गया।

भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर से एक विशाल वाहन रैली निकाली गई, जो शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए नई आबादी स्थित सांसद निवास पहुंची। यहाँ सांसद सुधीर गुप्ता को प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसका भूमिका अनिल सांखला ने प्रस्तुत की। ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2009 में शिक्षा का अधिकार कानून पारित हुआ था और 2017 के संशोधन में कक्षा 1 से 8 तक के सभी शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया। इस नियम के कारण राज्य सरकारों द्वारा वर्ष 2009 से पूर्व नियुक्त उन शिक्षकों पर भी परीक्षा देने का दबाव बनाया जा रहा है, जिन्हें सेवा में 25 से 30 वर्ष हो चुके हैं। इस कानून के खिलाफ शिक्षक संगठन सुप्रीम कोर्ट गए थे, जहाँ न्यायालय ने संसद में पारित आईटीई 2009, 2017 के नियमों का हवाला देते हुए निर्णय दिया कि, आपको टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना ही होगी। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने परीक्षा पास करने की अवधि मार्च 2027 से बढ़ाकर मार्च 2028 तक कर दी है एवं सभी राज्य सरकारों को वर्ष में दो बार टीईटी परीक्षा पास करने निर्देश भी दिया। शिक्षकों का तर्क है कि 50 से 55 वर्ष की आयु में टीईटी परीक्षा देना व्यावहारिक नहीं है। ये सभी शिक्षक शासन द्वारा निर्धारित योग्यताओं और चयन प्रक्रिया को पूरा करके ही नियुक्त हुए हैं और इनके प्रयासों से प्रदेश का शिक्षा परिणाम लगातार बेहतर हो रहा है। अतः आरटीई 2017 की धारा 23 में पुनः संशोधन कर वर्ष 2009 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस परीक्षा से स्थायी मुक्ति दी जाए। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद देश भर में टीईटी परीक्षा के विरोध में पहला शंखनाद रतलाम जिले के पिपलौदा से हुआ जहां से पदयात्रा मंदसौर जिला मुख्यालय पर पहुंची है।

ज्ञापन स्वीकार करते हुए सांसद सुधीर गुप्ता ने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि वे इस गंभीर पीड़ा को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान तक अवश्य पहुंचाएंगे और देश भर के लाखों शिक्षकों को राहत दिलाने का प्रयास करेंगे। कार्यक्रम के अंत में रतलाम से आए श्री दीपक सुराणा ने सभी का आभार व्यक्त किया।

पदयात्रा संयोजक अम्बाराम बोस सहित पुरी यात्रा में शुरू से साथ रहे पिपलौदा के शिक्षक साथी पवन पटवा, जितेन्द्रसिंह राठौर, ओमप्रकाश पोरवाल, विजेन्द्रसिंह राठौर, विनोद जैन, सुनील खैर, हृदेश राठौर और महिपाल सिंह भाटी भी मंदसौर आये।

इस पूरे आंदोलन और स्वागत कार्यक्रम में अध्यापक संयुक्त संघर्ष मोर्चा के जिला अध्यक्ष श्री गजराज सिंह सिसोदिया, जिला संयोजक रोहित सिंह चौहान, गोविंदराम गहलोत, सुरेश भैंसावल, जिला महासचिव अनिल सांखला, चंद्रप्रकाश जैन, अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा एवं समन्वय समिति के जिला अध्यक्ष तेजसिंह पवार, मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष विक्रम शर्मा, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त व तृतीय श्रेणी कर्मचारी संगठन के पूर्व जिला अध्यक्ष श्री अशोक शर्मा और पेंशनर संघ के श्री सतीश नागर, मल्हारगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष प्रहलाद खटोड़, विनोद चौहान, दलोदा ब्लॉक अध्यक्ष गोपाल सिंह आंजना, संरक्षक शांतिलाल ढडिंग, जितेन्द्र ठाकुर, महिला मोर्चा जिला प्रभारी श्रीमती विमलवाणी दुबे, सदस्य चंद्रावती राठौर, मंजू तोमर, ज्योति चौहान, सुशीला पालरिया, महेश सोलंकी, गोविंद माधव तिवारी, महेंद्र सिंह तोमर, मनोहर परमार, कैलाश राठौर, फरजान, नानालाल गायरी, खुमान सिंह भाटी, जगदीश परमार, मुकेश कुमार टेलर, बालमुकुंद सूर्यवंशी, भंवर सिंह पंवार (लसूडिया इला), चरणजीत पंवार, कैलाश चंद्र शर्मा, परसराम कापड़िया सहित रतलाम के शिक्षक साथी रतलाम से शिक्षक साथी तृतीय वर्ग प्रांतीय सलाहकार दीपक सुराणा, संयुक्त मोर्चा रतलाम की जिलाध्यक्ष आराधना निगुड़कर, विनेश राव सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित थे।

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