
नयी दिल्ली, 02 जून (वार्ता) सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के लिए आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने और उत्पादक मूल्य सूचकांकों (पीपीआई) के संकलन को मंजूरी दे दी है तथा नयी श्रृंखला के आधार पर थोक महंगाई (डब्यूपीआई) तथा पीपीआई का पहला आंकड़ा 15 जून को जारी किया जाएगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रायल की मंगलवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार नयी श्रृंखला को अपनाने को लेकर 25 मई को आयोजित बैठक में सक्षम प्राधिकारी द्वारा मंजूरी दे दी गई है। इससे पहले, मूल्य एवं जीवन-यापन लागत सांख्यिकी (एसपीसीएल पर तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) ने प्रस्तावित संकलन पद्धति को अनुमोदित किया था। बाद में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के समक्ष भी इसे प्रस्तुत किया गया था।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि उपरोक्त निर्णयों के अनुसार उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा 15 जून ,2026 को दोपहर 12:00 बजे आधार वर्ष 2022-23 वाली संशोधित थोक मूल्य सूचकांक श्रृंखला जारी की जाएगी, जो अब तक चली आ रहे आधार वर्ष 2011-12 पर आधारित थोक मूल्य सूचकांक श्रृंखला का स्थान लेगी। डीपीआईआईटी के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा इसके अतिरिक्त कुछ और श्रृंखलाएं भी जारी की जाएंगी जिनमें आउटपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (ओपीपीटी) परीक्षणात्मक इनपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (आईपीपीआई) सात प्रकार की सेवाओं के सेवा उत्पादक मूल्य सूचकांक (सर्विसेज पीपीआई) इन सेवाओं में शामिल हैं। इन सेवाओं में बैंकिंग, प्रतिभूति लेन-देन, बीमा,पेंशन फंड प्रबंधन, रेलवे, हवाई यात्री सेवाएँ और दूरसंचार सेवाएं शामिल की गयी है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि थोक मूल्य सूचकांक का व्यापक उपयोग मूल्य वृद्धि संबंधी अनुबंधों में होता है, इसलिए संशोधित श्रृंखला जारी होने की तिथि से अगले पाँच वर्षों तक डब्ल्यूपीआई और पीपीआई दोनों साथ-साथ जारी किए जाएंगे। इसके बाद डब्ल्यूपीआई को बंद कर दिया जाएगा। इससे उपयोगकर्ताओं को डब्ल्यूपीआई से पीपीआईकी ओर स्थानांतरित होने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
यह बदलाव विकसित अर्थव्यवस्थाओं की वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सिफारिशों के अनुरूप है। सरकार का कहना है कि आउटपुट (उत्पादन) पीपीआई और इनपुट (साधान-सामग्री) पीपीआई दोनों की उपलब्धता से उद्योगों में उत्पादों और उपयोग किए जा रहे इनपुट की कीमतों में होने वाले बदलावों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि उत्पादकों द्वारा इनपुट पर अनुभव की गई महंगाई किस प्रकार अंतिम उत्पादों की कीमतों में परिलक्षित होती है।
सेवा पीपीआई का प्रथम चरण सात सेवाओं के लिए प्रशासनिक स्रोतों से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। भविष्य में डेटा उपलब्धता के अनुसार और सेवाओं को इसमें शामिल किया जाएगा।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि डब्ल्यूपीआई और आउटपुट पीपीआई के आंकड़े मासिक आधार पर संकलित किए जाएंगे। मई 2026 (प्रारंभिक) के आंकड़े तथा अप्रैल 2023 से अप्रैल 2026 तक की पिछली श्रृंखला (37 माह की) 15 जून 2026 को जारी की जाएगी।मासिक परीक्षणात्मक इनपुट पीपीआई (केवल विनिर्माण क्षेत्र हेतु) मार्च 2026 से प्रयोगात्मक आधार पर प्रकाशित किया जाएगा। सेवा पीपीआई त्रैमासिक आधार पर जारी होगा तथा 2025-26 की चौथी तिमाही (प्रारंभिक) और 2023-24 की पहली तिमाही से 2025-26 की तीसरी तिमाही तक की पिछली श्रृंखला के साथ प्रकाशित किया जाएगा।
नई डब्ल्यूपीआई श्रृंखला (2022-23) में शामिल कुल वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़कर 957 हो गई है। बिजली समूह में नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा को जोड़ा गया है तथा इसमें सौर ऊर्जा , पवन ऊर्जा तथा परमाणु बिजली को भी शामिल किया गया है। कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को “प्राथमिक वस्तुएँ” ( समूह से हटाकर “ईंधन एवं ऊर्जा” ) समूह में शामिल किया गया है, जिससे कोयला, बिजली और पेट्रोलियम उत्पादों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित होगा। भारांक की पद्धति में सुधार किया गया है। नयी श्रृंखला में भार निर्धारण के लिए सकल उत्पादन मूल्य (जीवीओ) का उपयोग किया गया है, जबकि पुरानी श्रृंखला में शुद्ध व्यापार मूल्य (एनटीवी) का उपयोग होता था।
