सिद्ध चक्र विधान: परिणामों की विशुद्धि से मिलती है आत्म सिद्धि

भोपाल। चौक धर्मशाला में आयोजित श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के दौरान आचार्य विद्यासमय सागर महाराज के शिष्य निर्यापक मुनि संभव सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में व्यक्ति सब कुछ कर पाए या नहीं, लेकिन अपने परिणामों को सदैव सुरक्षित और विशुद्ध बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिणामों की पवित्रता ही आत्म सिद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। मुनिश्री ने साधना और आराधना विवेकपूर्वक करने पर बल देते हुए कहा कि विवेकयुक्त आचरण ही सफलता की वास्तविक सीढ़ी है।

मुनि संघ के सानिध्य में आयोजित विधान में मंडल पर 32 अर्घ्य समर्पित किए गए। आयोजक ऋषभ जैन ने बताया कि जाप-अनुष्ठान और सायंकालीन आरती का क्रम जारी है। कार्यक्रम का समापन 7 जून को विश्व शांति यज्ञ एवं भगवान जिनेंद्र की भव्य शोभायात्रा के साथ होगा। विधान में अनेक श्रद्धालुओं ने विभिन्न भूमिकाओं में सहभागिता करते हुए मंडल पर अर्घ्य अर्पित किए।

 

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