कुवैत, 01 जून (वार्ता) कुवैत की वायु सेना ने देश को लक्ष्य बनाकर दागी गयी ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोक दिया है। यह घटनाक्रम सप्ताहांत में ईरानी सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है कुवैती सेना के जनरल स्टाफ ने यह जानकारी दी है।
जनरल स्टाफ ने सोमवार को एक बयान में कहा, “फिलहाल, कुवैती वायु रक्षा प्रणालियाँ दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोक रही हैं। जनरल स्टाफ ने निवासियों से सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करने का आग्रह किया। यह घोषणा तब की गयी जब अमेरिका ने कहा कि उसने आत्मरक्षा और क्षेत्रीय शिपिंग मार्गों की सुरक्षा का हवाला देते हुए गोरुक और केशम द्वीप पर स्थित ईरानी रडार और ड्रोन कमांड-एंड-कंट्रोल सुविधाओं पर हमला किया है। गौरतलब है कि कुवैत में अमेरिका का एक बड़ा सैन्य अड्डा स्थित है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी ) ने कहा कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जवाबी कार्रवाई करते हुए एक अमेरिकी अड्डे को निशाना बनाया है। आरोप है कि इस अड्डे का इस्तेमाल होर्मोज़गान प्रांत में ईरान के सीरिक द्वीप पर हमले करने के लिए किया गया था। आईआरजीसी ने कहा कि उसने पहले से तय किए गए उन ठिकानों पर हमला किया है, जिनका संबंध सीरिक द्वीप पर स्थित एक दूरसंचार टावर पर हुए अमेरिकी हमले से था। आईआरजीसी ने दावा किया कि इस कार्रवाई के ज़रिए उसके सभी निर्धारित लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिए गए हैं। इस बल ने चेतावनी दी कि अमेरिका द्वारा की जाने वाली किसी भी और सैन्य कार्रवाई का जवाब “पूरी तरह से अलग” तरीके से दिया जाएगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने तेहरान की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को उन क्षेत्रीय ठिकानों और संपत्तियों पर जवाबी हमले करने का पूरा अधिकार है, जिनका इस्तेमाल उसके देश पर हमले करने के लिए किया जाता है। श्री बघाई सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “सभी देशों का यह एक स्थापित कानूनी दायित्व है कि वे अपने क्षेत्र या संपत्तियों का इस्तेमाल किसी अन्य देश पर आक्रमण करने के लिए न होने दें।” उन्होंने यूरोपीय संघ पर चुनिंदा नैतिक आक्रोश दिखाने का आरोप लगाते हुए, ईरान की कार्रवाई की आलोचना को ‘पाखंडपूर्ण और गैर-ज़िम्मेदाराना’ करार दिया। इससे पहले, यूरोपीय संघ ने कुवैत पर हुए कथित ईरानी हमलों की निंदा करते हुए कहा था कि ये हमले कुवैत की संप्रभुता का उल्लंघन हैं और इनसे क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
