इंदौर: शहर की बिचौली हप्सी तहसील में तहसीलदार ने सीलिंग के जमीन का कलेक्टर की रोक होने के बावजूद नामांतरण कर दिया. शहर में सीलिंग जमीनों पर पूर्व कलेक्टर ने नामांतरण कर रोक लगाई थी और निर्देश जारी किए थे कि शहर में सीलिंग की जमीन बिना कलेक्टर से अनुमति लिए नामांतरण नहीं की जा सकती है.
मामला बिचौली हप्सी तहसील के ग्राम बिचोली की खसरा 34 /3/2से संबंधित जमीन का है, जिसकी रजिस्ट्री आशा जैन पति दिलीप जैन द्वारा वर्ष 2004 में कराई गई थी. 2004 से लेकर 2025 तक इसका नामांतरण किसी भी तहसीलदार द्वारा नहीं किया गया है.
वर्ष 2022 में तत्कालीन कलेक्टर मनीषसिंह ने 1882/अ क री/2022 दिनांक 4.11.2022 में सीलिंग जमीनों के लेकर हस्तांतरण से पूर्व कलेक्टर की अनुमति आवश्यक होने का आदेश किया था. उक्त जमीन पूर्व में मां राजेश्वरी गृह निर्माण संस्था की रही है, जिसका खसरा नंबर 34 रकबा 9.940 हेक्टर सम्मिलित था, किंतु संस्था द्वारा सीलिंग की शर्तों का उल्लंघन कर उक्त जमीन रसूखदार व्यक्तियों को बेच दी गई.
इसमें सीलिंग की धारा 20(5) की अनुमति नहीं थी. सीलिंग प्रकरण क्रमांक 2/अ/90 सी 19(5 )/ 1988- 89 आदेश दिनांक 7-10-1989 के द्वारा संस्था को सीलिंग की धारा 19 के तहत छूट प्रदान की गई थी. आशा जैन द्वारा नामांतरण का आवेदन 20 साल बाद लगाया गया था. तहसीलदार द्वारा दिसंबर 2025 में निरस्त कर दिया गया, किंतु पुनः प्रकरण को शुरू करते हुए जनवरी 2026 में इसका आदेश कर दिया गया. प्रकरण को तहसीलदार द्वारा निरस्त करने के बाद एसडीएम कोर्ट में अपील की जानी चाहिए थी, किंतु तहसीलदार ने पुनः सुनवाई करते हुए आदेश पारित कर दिया.
महत्वपूर्ण बात यह है कि उक्त जमीन की रजिस्ट्री का नामांतरण 20 साल से 15 तहसीलदारों द्वारा नहीं किया गया. उसे तत्कालीन तहसीलदार बलबीर सिंह राजपूत ने कर दिया. मामले का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता केडी मिश्रा की शिकायत पर जांच में सामने आया है. तहसीलदार राजपूत की शिकायत मिलने पर पिछले महीने कलेक्टर द्वारा हटा दिया गया था. कलेक्टर के प्रतिबंधात्मक आदेश होने के बाद भी जमीन का नामांतरण कर दिया था
