इस्लामाबाद | अमेरिकी न्यूज आउटलेट CBS न्यूज की एक रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमानों को अपने नूर खान एयरबेस पर पार्क करने की गुप्त अनुमति दी, ताकि उन्हें अमेरिकी हवाई हमलों से बचाया जा सके। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि ईरान ने अपनी सैन्य संपत्तियों, विशेष रूप से RC-130 जासूसी विमानों को सुरक्षित रखने के लिए पड़ोसी देश का सहारा लिया। रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम की घोषणा के बाद तेहरान ने रणनीतिक रूप से अपने विमान रावलपिंडी के पास स्थित इस बेस पर भेजे थे।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन मीडिया रिपोर्टों को ‘गुमराह करने वाली और सनसनीखेज’ करार देते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नूर खान एयरबेस पर मौजूद ईरानी विमान किसी सैन्य बचाव मिशन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे राजनयिक उद्देश्यों और शांति वार्ता की सुरक्षा टीमों की आवाजाही के लिए वहां मौजूद हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों का तर्क है कि नूर खान बेस शहर के बीचों-बीच स्थित है, ऐसे में वहां विमानों के किसी बड़े बेड़े को छिपाकर रखना मुमकिन नहीं है। पाकिस्तान ने इसे शांति प्रयासों को कमजोर करने वाली साजिश बताया है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में कार्य कर रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि वह पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति बहाली के लिए एक पारदर्शी डिप्लोमैटिक चैनल के रूप में सक्रिय है। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, ईरान के साथ उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत जारी है और विमानों की मौजूदगी केवल आगामी शांति वार्ता की तैयारियों का हिस्सा है। इस विवाद ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और बड़े देशों के बीच चल रही कूटनीतिक रस्साकशी को केंद्र में ला दिया है।

