
बीना। संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा एवं ज्ञान महोत्सव में सुश्री जया किशोरी ने कहा कि मनुष्य चाहे कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए, यदि उसके जीवन में भगवान का स्मरण नहीं है तो उसका जीवन अधूरा है। ईश्वर को पाने के लिए वर्षों की कठिन तपस्या आवश्यक नहीं होती, बल्कि सच्चे मन से किया गया स्मरण, प्रेम और समर्पण ही भगवान तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग है। भगवान समय नहीं देखते, वे भाव देखते हैं।”उन्होंने कहा कि आज के समय में मनुष्य भौतिक सुखों की दौड़ में इतना व्यस्त हो गया है कि वह अपने भीतर की शांति खोता जा रहा है। यदि व्यक्ति प्रतिदिन कुछ समय भक्ति, सत्संग और सेवा के लिए निकाल ले, तो उसके जीवन की अनेक परेशानियां स्वतः समाप्त होने लगती हैं। उन्होंने कहा कि
“जहां प्रेम होता है, वहां भगवान स्वयं निवास करते हैं। मन में द्वेष, अहंकार और ईर्ष्या रखकर कोई भी व्यक्ति सच्ची भक्ति नहीं कर सकता। भगवान को पाने का सबसे सरल मार्ग सेवा, करुणा और विनम्रता है।”
