ढौंढ़न बांध स्थल पर आदिवासियों का ‘अग्नि सत्याग्रह’: जल, जंगल और जमीन के लिए चिताओं पर लेटीं महिलाएं

छतरपुर/बमीठा:केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत बनने वाले ढौंढ़न डैम के निर्माण स्थल पर आदिवासियों का आंदोलन तीसरे दिन और अधिक उग्र और हृदयविदारक हो गया है। अपनी पुश्तैनी जमीन और अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे स्थानीय आदिवासी अब सामूहिक सांकेतिक आत्मदाह की राह पर हैं। आंदोलन स्थल से आ रही तस्वीरें विचलित करने वाली हैं, जहाँ आदिवासी महिलाएं अपने दुधमुंहे बच्चों को सीने से लगाकर धधकती चिताओं पर लेटी हुई नजर आ रही हैं।
“लाशों पर खड़ी होगी बांध की दीवार”
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई ने उन्हें इस आत्मघाती कदम के लिए मजबूर किया है। आंदोलनकारी सुरक्षा घेरा तोड़कर निर्माण स्थल तक जा पहुंचे हैं। प्रदर्शनकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि प्रशासन को बांध की दीवार खड़ी करने से पहले उनकी लाशों से गुजरना होगा। दिव्या अहिरवार के नेतृत्व में चल रहे इस प्रदर्शन में दूर-दराज के गांवों से हजारों आदिवासी पैदल चलकर पहुंच रहे हैं।
प्रमुख मांग: अमित भटनागर की रिहाई
आंदोलनकारियों का गुस्सा केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है। वे अपने नेता अमित भटनागर की तत्काल रिहाई की मांग कर रहे हैं। निर्माण स्थल “अमित भटनागर को रिहा करो या हमें अग्नि के हवाले करो” के नारों से गूंज रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अपने पूर्वजों की कब्रों और अपनी संस्कृति को विकास की बलि नहीं चढ़ने देंगे। भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद, प्रशासन के आला अधिकारियों की अनुपस्थिति ने आदिवासियों के आक्रोश को और भड़का दिया है।
कल पहुंचेंगे जीतू पटवारी, गरमाएगी सियासत
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी कल, 12 मई को ढौंढ़न बांध स्थल पहुंचेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पटवारी 11 मई की रात खजुराहो पहुंचेंगे और 12 मई की सुबह बमीठा व रनगुवा होते हुए सीधे आंदोलन स्थल पर विस्थापित आदिवासियों से संवाद करेंगे। कांग्रेस ने आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के लिए सड़क से सदन तक लड़ने का संकल्प दोहराया है।
विस्फोटक हुए हालात
फिलहाल मौके पर स्थिति तनावपूर्ण और विस्फोटक बनी हुई है। एक ओर जहां विकास की बड़ी परियोजना की आधारशिला रखी जानी है, वहीं दूसरी ओर हजारों आदिवासियों का भविष्य और उनकी भावनाएं दांव पर लगी हैं। प्रशासन की चुप्पी इस संकट को और गहरा कर रही है।

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