शादी की धुन या खतरे की गूंज? मॉडिफाइड डीजे गाड़ियां बनी मुसीबत

इंदौर: शादी समारोहों का दौर अपने चरम पर है. शहर में लगातार शादियों की धूम रहेगी. भारतीय परंपरा के अनुसार बारातों में बैंड-बाजा, डीजे और नाच-गाना उत्सव का हिस्सा माने जाते हैं, लेकिन अब यही उत्सव आम नागरिकों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बनता जा रहा है. खासकर सड़कों पर दौड़ रही अवैध रूप से मॉडिफाइड डीजे और बैंड गाड़ियां शहर की यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं.

शहर की सड़कों पर इन दिनों बड़ी संख्या में ऐसे डीजे वाहन दिखाई दे रहे हैं जिनमें नियमों के विपरीत भारी लोहे के ढांचे, विशाल स्पीकर, जनरेटर, ऊंचे प्लेटफॉर्म और चमकदार लाइटें लगाई गई हैं. कई वाहन मालिक गाड़ियों की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई तक बढ़ा देते हैं, जबकि मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार वाहन की मूल संरचना में बिना अनुमति बदलाव करना पूरी तरह अवैध है.

इसके बावजूद ये मॉडिफाइड वाहन खुलेआम शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मॉडिफिकेशन सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं. भारी स्ट्रख्र और असंतुलित डिजाइन के कारण ऐसे वाहनों के पलटने, बिजली के तारों से टकराने और संकरी सड़कों पर दुर्घटना होने की आशंका लगातार बनी रहती है. कई बार बारातों के दौरान ये वाहन पूरे रास्ते को घेर लेते हैं, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. तेज आवाज में बजने वाले डीजे से ध्वनि प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है. देर रात तक गूंजने वाले हाई बेस साउंड से बुजुर्ग, बच्चे, मरीज और आम नागरिक परेशान हैं.

जुगाड़ की गाड़ियां
चित्र- जुगाड़
सिर्फ डीजे वाहन ही नहीं इंदौर में जुगाड़ की भी कई गाड़ियां सड़कों पर बेलगाम चल रही है यह अधिकतर गाड़ियां गन्ने का जूस बेचने निकलती है. इन गाड़ियों को जुगाड़ के नाम से जाना जाता है और यह एक इंजन के जरिए चलती है जिसका ना तो रजिस्ट्रेशन होता है, ना ही नंबर प्लेट होती है और ना ही इसका किसी भी प्रकार का वैध कागजात होते हैं सिर्फ जुगाड़ से बनाई हुई गाड़ियां है.

सुनने की क्षमता होती है प्रभावित
डॉक्टर सौरभ गुप्ता के अनुसार अत्यधिक तेज ध्वनि कानों के पर्दों को नुकसान पहुंचा सकती है, लगातार सीं-सीं की आवाज यानी टिनिटस की समस्या पैदा कर सकती है और सुनने की क्षमता तक प्रभावित हो सकती है. उन्होंने बताया कि तेज बेस साउंड से उच्च रक्तचाप, दिल की धड़कन तेज होना, मानसिक तनाव, सिरदर्द और अनिद्रा जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं. गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर अधिक गंभीर होता है. यहां तक कि कई क्षेत्रों में लोगों ने घरों की दीवारों में कंपन जैसी शिकायतें भी की हैं.

अधिक आवाज में बजाना नियमों का उल्लंघन
डॉ. सुमित शुक्ला ने कहा कि पहले अस्पतालों और स्कूलों के बाहर साइलेंस ज़ोन के बोर्ड स्पष्ट रूप से लगे रहते थे, लेकिन अब अधिकांश जगहों से ऐसे बोर्ड गायब हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि तय डेसीबल सीमा से अधिक आवाज में डीजे बजाना नियमों का उल्लंघन है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि इससे मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों को गंभीर परेशानी होती है.

कार्रवाई कर जब्त कर सकते हैं
अधिवक्ता कृष्ण कुमार कुन्हारे का कहना है कि डीजे की अधिकांश गाड़ियां पूरी तरह अवैध मॉडिफिकेशन करके तैयार की जाती हैं. जब टू-व्हीलर के मॉडिफाइड साइलेंसर पर कार्रवाई हो सकती है तो खुलेआम नियम तोड़कर चल रहे इन भारी डीजे वाहनों पर सख्ती क्यों नहीं होती. उन्होंने कहा कि ऐसे वाहन न केवल ट्रैफिक व्यवस्था बिगाड़ते हैं बल्कि जनस्वास्थ्य और जनसुरक्षा के लिए भी खतरा हैं. भारतीय न्याय संहिता, कमिश्नर आदेश उल्लंघन की धारा 223-ए और मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत इन वाहनों पर कार्रवाई कर उन्हें जब्त किया जा सकता है.

बिना अनुमति बदलाव अवैध
आरटीओ राजेश गुप्ता ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 52 के अनुसार किसी भी वाहन की मूल संरचना में बिना अनुमति बदलाव करना अवैध है. निर्धारित आकार से बड़े डीजे स्ट्रख्र, अत्यधिक शक्तिशाली ऑडियो सिस्टम, बड़े स्पीकर, मल्टीकलर एलईडी और भारी लोहे के ढांचे नियमों के विरुद्ध हैं. ऐसे मामलों में 5 से 10 हजार रुपए तक जुर्माना, वाहन जब्ती और गंभीर स्थिति में गिरफ्तारी तक की कार्रवाई की जा सकती है.

सहयोग करेगी यातायात पुलिस
इंदौर डीसीपी राजेश त्रिपाठी (क्राइम एवं प्रभारी यातायात) ने कहा कि मॉडिफाइड वाहनों के खिलाफ यदि आरटीओ द्वारा कार्रवाई की जाती है तो यातायात पुलिस पूरा सहयोग करेगी।

सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए
शहरवासियों का कहना है कि शादी समारोहों की खुशियां बनी रहनी चाहिए, लेकिन उत्सव के नाम पर नियमों की अनदेखी और लोगों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध मॉडिफाइड डीजे और बैंड वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए, तय ध्वनि सीमा का सख्ती से पालन कराया जाए और देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजाने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि किसी की खुशी दूसरे के लिए परेशानी और खतरे का कारण न बने.

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