जबलपुर: जबलपुर पर्यटन की दृष्टि से बेहद संभावनाशील शहर है। यहां प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन के अनेक ऐसे केंद्र मौजूद हैं, जहां होम स्टे की अवधारणा को नई पहचान मिल सकती है। होम स्टे केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि मेहमानों के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करने का माध्यम है। पर्यटन में व्यवसायिक सोच के अलावा अतिथियों के अनुभव और सुविधा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
इससे न केवल पर्यटकों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि जबलपुर और मध्यप्रदेश का पर्यटन ब्रांड भी अधिक मजबूत और समृद्ध होगा। यह बातें कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा होटल कल्चुरी में आयोजित रीजनल होम स्टे समिट के आयोजन में कहीं।कार्यक्रम की शुरुआत में बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे में मृत व्यक्तियों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कलेक्टर सिंह ने कहा कि होम स्टे का उद्देश्य केवल महंगे होटलों का विकल्प उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपरा और आत्मीयता से पर्यटकों को जोडऩा है। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रशिक्षण और व्यवस्थित प्रबंधन के माध्यम से होम स्टे को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रतिभागियों द्वारा 12 स्टॉल भी लगाए गए
कलेक्टर ने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण सत्रों को गंभीरता से लेने का आग्रह करते हुए कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजकों ने बताया कि मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के निर्देश पर रीजनल होम स्टे समिट की शुरुआत जबलपुर से की गई है और यह प्रदेश का पहला आयोजन है। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों द्वारा होम स्टे से संबंधित उत्पादों और सेवाओं के लगभग 12 स्टॉल भी लगाए गए। कलेक्टर सिंह ने स्टॉलों का अवलोकन कर संबंधित उत्पादों की जानकारियां लीं तथा प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के डायरेक्टर डी.बी. सिंह, प्रबंधक गायत्री जोशी, वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीकांत शर्मा तथा एसआईएचएम के प्राचार्य दविंदर सिंह सहित पर्यटन और होम स्टे क्षेत्र से जुड़े कई लोग उपस्थित रहे।
