नई दिल्ली | फिक्की-ईवाई (FICCI-EY) रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री में बॉलीवुड गानों का प्रभुत्व कम हो रहा है और क्षेत्रीय संगीत एक बड़े बाजार के रूप में उभर रहा है। हिंदी फिल्मों के साउंडट्रैक खरीदने की बढ़ती लागत और सब्सक्रिप्शन मॉडल से होने वाली कम आय ने टाइम्स म्यूजिक, वार्नर म्यूजिक और सारेगामा जैसी बड़ी कंपनियों को अपना रुख बदलने पर मजबूर कर दिया है। ये कंपनियां अब भोजपुरी, पंजाबी, हरियाणवी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के कैटलॉग को तेजी से अधिग्रहित कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस एकीकरण से कंपनियों को विज्ञापनदाताओं के साथ बेहतर मोलभाव करने और संसाधनों का सही उपयोग करने में मदद मिलेगी।
इंडस्ट्री के इस एकीकरण से न केवल बड़े प्लेयर्स बल्कि छोटे लेबल्स को भी फायदा पहुंच रहा है। बड़ी कंपनियां फाइनेंस की समस्याओं को दूर कर बेहतर कंटेंट और लाइसेंसिंग के अवसर उपलब्ध करा रही हैं। वहीं, छोटे लेबल्स को उनके कम उपयोग किए गए कैटलॉग के लिए सही रॉयल्टी और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन का विस्तार मिल रहा है। इससे उन छोटे लेबल्स को वित्तीय संकट से उबरने में मदद मिल रही है जो मुख्य रूप से यूट्यूब और स्ट्रीमिंग रेवेन्यू पर निर्भर थे। साझा मार्केटिंग और डेटा-संचालित रणनीतियों के माध्यम से अब क्षेत्रीय संगीत को वैश्विक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स तक सुगमता से पहुंचाया जा रहा है।
यद्यपि यह एकीकरण फायदेमंद दिख रहा है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी हैं। क्षेत्रीय बाजारों में बड़े खिलाड़ियों के प्रवेश से एकाधिकार (Monopoly) का खतरा बढ़ सकता है, जिससे छोटी परियोजनाओं की लागत में वृद्धि संभव है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में ऑडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने सब्सक्रिप्शन की कीमतें आधी कर दी हैं क्योंकि दर्शक अब स्टैंड-अप कॉमेडी और पॉडकास्ट की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। ऐसे में भविष्य में क्षेत्रीय गानों को खरीदने का चलन और तेज होगा, ताकि फिल्मी संगीत के महंगे अधिकारों से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सके और कमाई के नए रास्ते खोले जा सकें।

