नई दिल्ली | रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों में तेजी आने से वित्त वर्ष 2026-27 में बिजली की मांग 5.0 से 5.5 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। यह पिछले वित्त वर्ष (2025-26) की तुलना में एक बड़ा सुधार होगा, जब मांग में वृद्धि मात्र एक प्रतिशत तक सीमित रही थी। इक्रा ने बताया कि संभावित ‘एल नीनो’ प्रभाव के कारण कम बारिश के आसार हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में बिजली की खपत बढ़ेगी। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और डेटा सेंटर्स जैसे उभरते क्षेत्रों से भी ऊर्जा की मांग को बड़ा समर्थन मिलने की उम्मीद है।
देश में बिजली उत्पादन की स्थिति पर इक्रा ने कहा कि तापीय ऊर्जा (Thermal Power) संयंत्रों का ‘प्लांट लोड फैक्टर’ (PLF) वर्ष 2026-27 में लगभग 65 प्रतिशत रहने का अनुमान है। कोयले की उपलब्धता के संदर्भ में संतोषजनक स्थिति बताते हुए एजेंसी ने कहा कि 8 अप्रैल 2026 तक घरेलू बिजली संयंत्रों के पास लगभग 19 दिनों के लिए पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद था। इक्रा के उपाध्यक्ष अंकित जैन के अनुसार, जहां एक ओर तापीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश पर फिर से जोर दिया जा रहा है, वहीं नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) क्षमता में भी तीव्र गति से विस्तार हो रहा है।
बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) की आर्थिक स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि मार्च 2025 तक राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों का सकल ऋण घटकर 7.1 लाख करोड़ रुपये रह गया है, लेकिन इक्रा ने वितरण क्षेत्र के लिए अपना दृष्टिकोण ‘नकारात्मक’ रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, कई राज्यों में शुल्क वृद्धि (Tariff Hike) काफी सीमित रही है, जिससे बिजली खरीद लागत और राजस्व के बीच प्रति इकाई 30-33 पैसे का बड़ा अंतर बना रह सकता है। इक्रा ने चेतावनी दी है कि राजस्व और लाभप्रदता के वर्तमान स्तर को देखते हुए कंपनियों पर कर्ज का इतना ऊंचा स्तर लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।

