जबलपुर: हाईकोर्ट में फर्जी लिफाफा पेश करने के मामले में पुलिस ने पांच के खिलाफ नए सिरे से एफआईआर दर्ज कर ली है। दरअसल वैवाहिक विवाद पर ससुराल पक्ष ने एक आपराधिक पुनरीक्षण प्रस्तुत किया था, जिसमें हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय के नाम से फर्जी लिफाफा तैयार कर यह दर्शाया गया कि याचिकाकर्ता को नोटिस मिल चुका है। इसी फर्जीवाड़े के आधार पर एकपक्षीय आदेश प्राप्त कर लिया गया था। बाद में जब याचिकाकर्ता को इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी हुई, तब उसने रजिस्ट्रार हाईकोर्ट के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी।
इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी लेकिन हाईकोर्ट के जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि न्यायिक आदेशों का पालन महज औपचारिकता निभाने या दिखावा करने तक सीमित नहीं हो सकता। एकलपीठ ने ओमती थाना में दर्ज एफआईआर अपूर्ण, भ्रामक और अदालत के आदेश की भावना के विरुद्ध पाते हुए निरस्त कर दी थी साथ ही पुलिस को निर्देश दिया था कि नए सिरे से सही एफआइआर दर्ज करें। कोर्ट ने के पूर्व निर्देश के पालन में ओमती थाना प्रभारी व एएसआई को लताड़ा भी था। मामले में अब नए सिरे से पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
विदित हो कि याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी वीरेंद्र पांडे की ओर से याचिका दायर की गई थी । दलील दी गई थी कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट में पदस्थ हैं और उसका वैवाहित विवाद चल रहा है। ससुराल पक्ष ने एक आपराधिक पुनरीक्षण प्रस्तुत किया था, जिसमें हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय के नाम से फर्जी लिफाफा तैयार कर यह दर्शाया गया कि याचिकाकर्ता को नोटिस मिल चुका है। इसी फर्जीवाड़े के आधार पर एकपक्षीय आदेश प्राप्त कर लिया गया। बाद में जब याचिकाकर्ता को इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी हुई, तब उसने रजिस्ट्रार हाईकोर्ट के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी।
शिकायत पर रजिस्ट्रार जनरल के निर्देशानुसार जिला न्यायाधीश (चतुर्थ) जबलपुर द्वारा प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें संबंधित लिफाफे के फर्जी होने की पुष्टि हुई थी। इसके पश्चात प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जबलपुर ने अपने पत्र के माध्यम से याचिकाकर्ता को एफआईआर दर्ज कराने व सक्षम न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता प्रदान की थी। याचिकाकर्ता ने थाने में शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब उन्होंने न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया था। मजिस्ट्रेट ने थाना ओमती को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
लेकिन पुलिस ने एफआईआर के नाम पर महज औपचारिकता की पूर्ति की गई थी। आरोपियों के नाम, पते में नरसिंहपुर, ओमती, जबलपुर सहित अन्य त्रुटियां की गईं। ऐसा इसलिए ताकि भौगोलिक परेशानी सामने आए और जांच ठप रहे। जिसे गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त कर नए सिरे से एफआईआर दर्ज करने आदेश दिया था। जिसके बाद याचिकाकर्ता की पत्नी शिल्पा पाण्डेय, सास मधुलता दुबे, साले शिवांक दुबे, जिठसास शिवानी चतुर्वेदी व साढूभाई अनूप चतुर्वेदी को आरोपी आरोपी बनाया गया है।
