काम में कोताही बर्दाश्त नहीं, सड़कों का रेस्टोरेशन सुधारें और किसानों को न हो परेशानी

छिन्दवाड़ा। अमृत 2.0 योजना के क्रियान्वयन में लेट लतीफी पर प्रभारी मंत्री ने नाराजगी जाहिर की और ठेकेदार पर पेनाल्टी लगाते हुए निर्धारित समय सीमा के अंदर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी नगरीय निकायों को पेयजल समस्या का स्थाई समाधान निकालने की बात कही। नगरीय निकाय सक्षम होते हैं और संभावित समस्याओं की पूर्व से जानकारी होती है, ऐसे में पूरी तैयारी रहनी चाहिए और समस्या के आते ही समाधान भी त्वरित होना चाहिए। नगर निगम में बीते दिनों आंधी तूफान के बाद आई पेयजल समस्या और नगरीय निकाय चैरई, जुन्नारदेव और परासिया की पेयजल समस्या के संबंध में समिति के सदस्यों द्वारा अवगत कराने पर प्रभारी मंत्री ने सभी संबंधित अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर को इस संबंध में बैठक करने और समस्या का स्थाई समाधान निकालने के निर्देश दिए। यह बात प्रदेश के लोक निर्माण विभाग मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह ने कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक के दौरान कही।

फसल विक्रय में न हो किसानों को परेशानी ०००००००

जिले में गेहूं उपार्जन और ई टोकन प्रणाली से खाद वितरण की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को फसल विक्रय में किसी तरह की किसानों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। यदि कहीं स्लॉट बुकिंग या खाद वितरण के लिए ई टोकन बुकिंग में सर्वर की समस्या संज्ञान में आए तो राज्य स्तर से समन्वय कर उसका त्वरित निराकरण करें। जिले में खाद की पर्याप्त उपलब्धता के संबंध लगातार मीडिया के माध्यम से किसानों तक इसका व्यापक प्रचार प्रसार नियमित रूप से किया जाए। ई टोकन बुकिंग में किसानों को तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

रेस्टोरेशन कार्य की गुणवत्ता पर जताई नाराजगी

प्रभारी मंत्री सिंह ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी द्वारा पाइप लाइन बिछाने के बाद कुछ स्थानों पर किए गए रोड रेस्टोरेशन कार्य की गुणवत्ता पर नाराजगी जाहिर की और गुणवत्ता सुधारने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पेयजल की स्थिति को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में नल जल योजनाओं का क्रियान्वयन सुचारू रहे। फील्ड में नियमित नजर बनाए रखें। जहां बोर कराए हुए थे, देख लें कि वे चल रहे हैं या नहीं, अन्यथा वैकल्पिक व्यवस्था बनाएं। पेयजल कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रहें। इनके नंबर ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत स्तर तक सभी को पता रहें। कंट्रोल रूम में आने वाली शिकायतों की विधिवत पंजी संधारित की जाए। शिकायतों का तत्परता से निराकरण कराते हुए ग्रामीणों से फीडबैक भी लिए जाएं। यह रिकॉर्ड आगामी वर्ष की पुख्ता पूर्व कार्ययोजना बनाने में बहुत उपयोगी साबित होगा।

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