लारेंस के अपराध का कॉरपोरेट स्टाइलः फेसटाइम-सिग्नल से चलता था नेटवर्क

इंदौर: क्राइम ब्रांच की पूछताछ में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क और उसकी अंदरूनी कार्यप्रणाली को लेकर कई सनसनीखेज तथ्य सामने आए हैं. पुलिस पूछताछ में लॉरेंस गैंग के गुर्गे हैरी बाक्सर ने बताया कि गैंग द्वारा न केवल संगठित तरीके से रंगदारी वसूल की जाती थी, बल्कि अपने ही शूटरों पर भरोसा न करते हुए उनकी निगरानी के लिए अलग से बदमाशों की तैनाती तक की जाती थी.
पुलिस पूछताछ में हैरी बाक्सर ने बताया कि किसी भी बड़ी वारदात से पहले रेकी करने वाले सदस्यों की भी निगरानी एक अलग टीम द्वारा की जाती थी, ताकि किसी तरह की चूक या अंदरूनी गड़बड़ी की संभावना खत्म की जा सके. इसी सख्त और खौफनाक व्यवस्था के चलते कई बदमाश दबाव में आकर पुलिस के सामने सरेंडर करने तक पहुंचे. पूछताछ में उसने यह भी बताया कि शहर के एक बड़े बिल्डर से गैंग ने करीब 5 करोड़ रुपए की रंगदारी वसूली थी. यह रकम सीधे नकद न लेकर क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेश भेजी गई और वहां से नेटवर्क के सरगना तक पहुंचाई गई. दहशत के कारण पीड़ित बिल्डर ने अब तक पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है.

गैंग का अगला निशाना रेसकोर्स रोड क्षेत्र का एक बिल्डर था
हैरी बाक्सर ने पुलिस को बताया कि जेल में रहते हुए ही एक आरोपी ने देवास के बदमाशों के माध्यम से बिल्डर की रेकी करवाई थी. गैंग का अगला संभावित निशाना रेसकोर्स रोड क्षेत्र में रहने वाला एक अन्य बिल्डर था, जिसके लिए जीतनगर के एक आरोपी को रेकी की जिम्मेदारी दी गई थी. योजना के अनुसार इशारा मिलते ही फायरिंग की तैयारी पूरी कर ली गई थी. गैंग के सदस्य आपसी संपर्क के लिए फेसटाइम और सिग्नल जैसे एन्कि्रप्टेड मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करते थे, जिससे उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो सके.

बायो कॉटन कारोबारी के घर गोलीबारी भी हैरी ने ही कराई थी
फायरिंग से जुड़े एक अन्य मामले में भी हैरी ने स्वीकार किया है कि बायो कॉटन कारोबारी के घर हुई गोलीबारी में उसकी भूमिका रही थी. बताया गया कि 50 लाख रुपए के लेनदेन विवाद की जानकारी गैंग तक पहुंचने के बाद पीड़ित को 10 करोड़ रुपए की फिरौती की धमकी दी थी. इस मामले में पुलिस ने देवास से एक अन्य सहयोगी को भी हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ जारी है.

रतलाम जिले का निवासी है हैरी, एक नेता का ड्रायवर रह चुका
इससे पहले भी आरोपी का नाम पंजाब पुलिस इंटेलिजेंस मुख्यालय पर रॉकेट लॉन्चर हमले जैसे गंभीर मामलों में सामने आ चुका है, जिसकी जांच राट्रीय जांच एजेंसी कर चुकी है. जानकारी के अनुसार आरोपी मूल रूप से रतलाम जिले के एक गांव का रहने वाला है. शुरुआत में वह एक स्थानीय नेता के यहां ड्राइवर के रूप में कार्यरत था और बाद में स्कूल संचालन से भी जुड़ा रहा. आर्थिक तंगी के चलते वर्ष 2021 के बाद वह अपराध की दुनिया में सक्रिय हुआ और धीरे-धीरे संगठित गिरोह से जुड़ गया.

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