
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम के वीर योद्धा राजा हिरदेशाह लोधी की विरासत को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। उनकी 168वीं पुण्यतिथि (शौर्य दिवस) पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि अब प्रदेश के विद्यार्थी राजा हिरदेशाह के जीवन और संघर्ष को पाठ्यक्रम में पढ़ेंगे, साथ ही नर्मदा तट पर उनके नाम से एक भव्य तीर्थ स्थल भी विकसित किया जाएगा।
राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि राजा हिरदेशाह का जीवन साहस, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उनके योगदान को संरक्षित करने के लिए राज्य सरकार उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर शोध कराएगी और उन्हें शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नर्मदा किनारे हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से तीर्थ स्थल का निर्माण कराया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां न सिर्फ उनके बारे में पढ़ें, बल्कि उनके जीवन को करीब से समझ भी सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सांस्कृतिक पुनरोत्थान के लिए प्रतिबद्ध है और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने राजा हिरदेशाह के संघर्ष को याद करते हुए बताया कि उन्होंने 1842 में ही अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका और 1858 तक लगातार संघर्ष करते रहे। उन्होंने बुंदेलखंड के बुंदेला और आदिवासी समाज को एकजुट कर स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।
सरकार द्वारा यह पहल न केवल इतिहास के गौरवशाली अध्यायों को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, बल्कि नई पीढ़ी को अपने नायकों से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
