नई दिल्ली | दिल्ली की सियासत में जारी भीषण घमासान के बीच आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने एक बड़ा रणनीतिक दांव चला है। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया आज राजघाट पहुंच रहे हैं, जिसे पार्टी ‘सत्याग्रह’ के शंखनाद के तौर पर देख रही है। यह कदम मनीष सिसोदिया द्वारा जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर न्यायिक प्रक्रिया से खुद को अलग करने के ऐलान के ठीक बाद आया है। आम आदमी पार्टी का मानना है कि वर्तमान जांच एजेंसियां राजनीति से प्रेरित होकर काम कर रही हैं, इसलिए अब बापू की समाधि पर नमन कर पार्टी अपनी नैतिक लड़ाई को सड़क पर ले जाने की तैयारी में है।
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि सोमवार को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को लिखे गए उस पत्र से जुड़ी है, जिसमें केजरीवाल ने मौजूदा कानूनी व्यवस्था और निष्पक्ष सुनवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। मनीष सिसोदिया ने भी स्पष्ट किया है कि अब उनके पक्ष में कोई वकील पेश नहीं होगा और सत्याग्रह ही एकमात्र रास्ता बचा है। राजघाट जाने के फैसले को पार्टी एक ‘मौन सत्याग्रह’ और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रही है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि जिस तरह से विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है, उसमें अदालत के बजाय जनता की अदालत में जाना ही सही विकल्प है।
दूसरी ओर, अरविंद केजरीवाल के राजघाट कार्यक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दिल्ली भाजपा का कहना है कि जब भ्रष्टाचार के मामलों में कानून का शिकंजा कसने लगता है, तब आम आदमी पार्टी को महात्मा गांधी की याद आने लगती है। भाजपा ने इसे सहानुभूति बटोरने का एक राजनीतिक नाटक करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि जांच का सामना करने के बजाय आप नेता वकीलों को हटाने और कोर्ट को चिट्ठी लिखने जैसी गतिविधियों से न्यायिक संस्थाओं की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल राजघाट पर भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है।

