चिकित्सालय के मुख्य द्वार पर लगी वाहनों की कतार

सतना :जिला चिकित्सालय परिसर में जिस छोटे से स्थान को वाहनों की पार्किंग के तौर पर निर्धारित किया गया है. वहां पर ज्यादा से ज्यादा आधा सैकड़ा दोपहिया वाहन ही खड़े हो सकते हैं.
पार्किंग में जगह न मिलने पर यदि वाहन को मुख्य परिसर में खड़ा कर दिया जाए तो ठेकेदार के गुर्गे 500 रु का जुर्माना वसूल लेते हैं. लिहाजा कोई रास्ता न देख मरीज के परिजनों ने अपने वाहनों को चिकित्सालय की चहरदिवारी से सटाकर खड़ा करना शुरु कर दिया है. लेकिन सडक़ किनारे आबाद हो चुकी इस अवैध पार्किंग ने अस्पताल आने जाने वाले मरीजों के साथ साथ राहगीरों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है.

जिला चिकित्सालय के दोनों मुख्य द्वार से होकर गुजरने वाला यातायात इन दिनों काफी हद तक बाधित नजर आता है. जिसका सीधा असर अस्पताल रोड पर भी देखने को मिलता है. दरअसल पिछले कुछ दिनों से अस्पताल के दोनों मुख्य गेट के बाहर लगभग सैकड़ा भर से अधिक दोपहिया वाहन खड़े रहते हैं. लगभग 200 मीटर तक के क्षेत्र में सडक़ किनारे वाहनों के खड़े रहने के कारण एक ओर जहां अस्पताल के मुख्य गेट का आवागमन प्रभावित होता है. वहीं दूसरी ओर अस्पताल रोड से गुजरने वाला यातायात भी बाधित होता रहता है.

ऐसा भी नहीं है कि सडक़ किनारे बन चुकी इस अवैध पार्किंग पर यातायात अथवा ननि अमले की नजर नहीं पड़ती. इससे पहले कई बार सडक़ किनारे खड़े वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई भी की जा चुकी है. लेकिन फिर समस्या के मूल को भांपते हुए कार्रवाई को अघोषित तौर पर शिथिल कर दिया गया. दरअसल चिकित्सालय परिसर में मर्चुरी की ओर जाने वाले मार्ग पर जिस स्थान को पार्किंग क्षेत्र के तौर पर निर्धारित किया गया है वहां पर बमुश्किल आधा सैकड़ा दो पहिया वाहन ही खड़े हो सकते हैं.

जबकि अस्पताल में हर रोज सैकड़ों वाहन पहुंचते हैं. अब जिन वाहनों को पार्किंग क्षेत्र में जगह नहीं मिल पाती उन्हें मजबूरी में अस्पताल के मुख्य परिसर में खड़ा करना पड़ता है. लेकिन वहां पर पहले से तैयार पार्किंग ठेकेदार के गुर्गे वाहनों में चैन लगाकर प्रति वाहन 500 रु की अवैध वसूली करने लगते हैं. नतीजतन अवैध वसूली से बचने के लिए लोगों ने अस्पताल परिसर से बाहर सडक़ किनारे अपने वाहनों को खड़ा करना शुरु कर दिया है.

   व्यवस्था न होने तक बंद हो वसूली
अस्पताल परिसर के मुख्य द्वार से सटे क्षेत्र में एक ओर जहां आमजन को अपने वाहन खड़े करने पर 500 रु का जुर्माना देना पड़ता है. लेकिन वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज के कुछ चिकित्सकों सहित आधा सैकड़ा वीआईपी वाहन वहां पर बेरोकटोक खड़े होते हैं. रही सही कसर वहां पर अवैध तौर पर मौजूद रहने वाले 108 और जननी एक्सप्रेस जैसे वाहनों का जमावड़ा पूरी कर देता है. ऐसी स्थितियों के बीच पार्किंग ठेकेदार के सामने प्रति माह 2.75 लाख रु आरकेएस में जमा करने की अनिवार्ययता है. जाहिर है आमजन से अवैध वसूली किए बिना ठेकेदार का काम नहीं चलने वाला. इतना ही नहीं बल्कि परिसर में पार्किंग का स्थान उपलब्ध न होने के बावजूद भी नए सिरे से टेंडर जारी कर दिया गया है. यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक बार फिर से नए ठेकेदार को अवैध वसूली का लाइसेंस मिल जाएगा. लिहाजा मौजूदा व्यवस्था का तकाजा यह कहता है कि जब तक परिसर में वाहनों की पार्किंग के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नही हो पाता. तब तक के लिए परिसर में वाहनों की पार्किंग को नि:शुल्क कर दिया जाना चाहिए

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