कांग्रेस ने ईसीआई द्वारा खरगे को भेजे नोटिस को कहा पक्षपातपूर्ण, मांगा और समय

नयी दिल्ली, (वार्ता) कांग्रेस ने गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को जारी कारण बताओ नोटिस का विरोध करते हुए चुनाव आयोग पर प्रक्रियात्मक खामियों एवं पक्षपात करने का आरोप लगाया और विस्तृत जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को संबोधित एक पत्र में, कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी को “एक ही संख्या वाले दो नोटिस मिले हैं, जिन पर दो अलग-अलग अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं,” जिससे आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।

उन्होंने कहा कि एक नोटिस में तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ’ब्रायन की शिकायत का उल्लेख किया गया है, वहीं आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किए गए दूसरे नोटिस में शिकायतकर्ता का नाम गायब है, जो उनके अनुसार नोटिस जारी करने में “लापरवाही एवं नियमित रवैया” दर्शाता है।

श्री रमेश ने 24 घंटे की समय सीमा पर भी आपत्ति दर्ज की और मौजूदा चुनाव अभियान को देखते हुए इसे अपर्याप्त करार दिया। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त इस नोटिस को केवल औपचारिकता के तौर पर जारी कर रहे हैं, न कि न्याय के निर्वाह के रूप में।” उन्होंने अतिरिक्त समय और कांग्रेस के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल को अपना पक्ष रखने का अवसर देने का अनुरोध किया।

यह नोटिस कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा की गई टिप्पणियों से संबंधित है जिसके बारे में पार्टी का कहना है कि इसे पहले ही सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जा चुका है।

श्री खरगे के स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए, कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी टिप्पणियों को संदर्भ से बाहर लिया गया था और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए आतंकवादी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था बल्कि उन्होंने संस्थानों के माध्यम से राजनीतिक विरोधियों को धमकान के एक पैटर्न का उल्लेख किया था।

अपने जवाब में, कांग्रेस ने आयोग पर सत्ताधारी दल के नेताओं द्वारा कथित उल्लंघनों को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया। उसने 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक की विफलता के बाद प्रधानमंत्री के हालिया राष्ट्र संबोधन का हवाला देते हुए दावा किया कि इसमें चुनाव अवधि के दौरान प्रत्यक्ष राजनीतिक हमले शामिल थे, जो आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है।

पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उन बयानों पर भी आपत्ति दर्ज की जिन्हें कांग्रेस ने वोटों के बदले लाभ देने का “लेन-देन” बताया और तर्क दिया कि ऐसे बयान चुनाव में अनुचित प्रभाव एवं रिश्वतखोरी से संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत आ सकते हैं।

पत्र में कहा गया, “ये चुनाव कानून का स्पष्ट उल्लंघन है जिस पर चुनाव आयोग को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए था।” इसमें आरोप लगाया गया कि आयोग ने अपनी जांच में चयनात्मक रवैया अपनाया है और सत्तारूढ़ दल के नेताओं के खिलाफ शिकायतों को नजरअंदाज करते हुए विपक्ष की ओर से होने वाली छोटी-मोटी बातों पर भी हमेशा सतर्क रहता है।

कांग्रेस ने दावा किया कि श्री खरगे का बयान आदर्श आचार संहिता या किसी भी कानूनी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करता है और कहा कि नोटिस “बिना सोचे-समझे” और “छिपे हुए इरादों” को दर्शाता है।

कांग्रेस ने नोटिस में प्रयुक्त “धमकी भरी भाषा” पर भी आपत्ति दर्ज की, विशेष रूप से बिना किसी और पत्राचार के संभावित कार्रवाई के संदर्भों पर। यह घटनाक्रम एक गरमागरम चुनावी माहौल के बीच सामने आया है, जिसमें कई राज्यों में मतदान हो रहा है और राजनीतिक बयानबाजी राजनीतिक दलों के बीच तीव्र हो रही है।

चुनाव आयोग प्रचार संबंधी आचार संहिता के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से नोटिस एवं सलाह जारी कर रहा है, जिसका उद्देश्य सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर प्रदान करना है।

हालांकि आयोग ने अभी तक कांग्रेस द्वारा अतिरिक्त समय के अनुरोध पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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