मुंबई, 17 अप्रैल (वार्ता) राजस्थान रॉयल्स के मैनेजर रोमी भिंडर को डगआउट के पास मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करते देखे जाने के बाद किसी भी गलत काम के आरोप से बरी कर दिया गया है – जबकि भ्रष्टाचार-रोधी नियमों के तहत ऐसा करना मना है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की भ्रष्टाचार-रोधी और सुरक्षा इकाई (एसीएसयू) ने इसे पहली बार किया गया अपराध मानते हुए उन पर 1 लाख रुपये का मामूली जुर्माना लगाया है। उन्हें चेतावनी भी जारी की गई है।
क्रिकबज ने 16 अप्रैल को रिपोर्ट दी थी कि भिंडर के खिलाफ कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
एसीएसयू की यह कार्रवाई एक कारण बताओ नोटिस और जांच के बाद हुई, जिसमें पाया गया कि भिंडर ने डगआउट के पास फ़ोन इस्तेमाल करने में लापरवाही बरती थी, लेकिन उनके किसी भी गलत इरादे का कोई सबूत नहीं मिला। इस चूक को पहली बार किया गया अपराध माना गया, और भिंडर – जो आईपीएल के पहले सीज़न से ही इससे जुड़े हुए हैं – के प्रति नरम रुख अपनाया गया। भ्रष्टाचार-रोधी और खिलाड़ी तथा मैच अधिकारी क्षेत्र (पीएमओए) के नियम पीएमओए के अंदर मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल पर रोक लगाते हैं। हालांकि टीम मैनेजरों को फ़ोन रखने की अनुमति होती है, लेकिन वे इसका इस्तेमाल सिर्फ़ ड्रेसिंग रूम के अंदर ही कर सकते हैं।
भिंडर, जो 2008 से राजस्थान रॉयल्स के मैनेजर हैं, को बताया गया है कि उनके लंबे अनुभव, पहली बार किए गए अपराध और मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति को देखते हुए उनके प्रति नरम रुख अपनाया गया है। उन्हें फेफड़ों की गंभीर समस्या का पुराना इतिहास रहा है, जिसके बारे में समझा जाता है कि उन्होंने बीसीसीआई को पहले ही जानकारी दे दी थी। यह घटना 10 अप्रैल को गुवाहाटी में राजस्थान रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के बीच हुए मैच के दौरान हुई थी। वैभव सूर्यवंशी, जो भिंडर के बगल में बैठे दिखे थे, को इस मामले में नहीं घसीटा गया है – और यह बिल्कुल सही भी है।

