खुलासा: प्रोत्साहन राशि देने से पहले बाबुओं से भरवाया गया था शपथ पत्र

जबलपुर: नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के तहत घोटाले में मंगलवार को एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। तत्कालीन डीन के हस्ताक्षर वाले इस वायरल पत्र ने मेडिकल प्रबंधन पर तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं। अब मौजूदा डीन डॉ. नवनीत सक्सेना पर कार्रवाई करने की नजर टिकीं हुईं हैं कि क्या घोटाले में जुड़े दोषियों पर गाज गिरती है या फिर उन्हें प्रबंधन द्वारा बचाकर ले जाया जाएगा , इस पर सवाल अभी बरकरार है।

वायरल पत्र के अनुसार मेडिकल कॉलेज प्रशासन को पहले से ही योजना में हुई वित्तीय गड़बड़ियों की जानकारी थी और उसी के चलते संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से बचाव के तौर पर शपथ पत्र भरवाए गए थे। सूत्रों की माने तो शपथ पत्र भरवाने का यह कदम प्रशासन द्वारा स्वयं को भविष्य की कार्रवाई से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया हो सकता है। जानकारों का मानना है कि यदि किसी योजना के भुगतान में पारदर्शिता और नियमों का पालन हुआ होता, तो इस प्रकार शपथ पत्र लेने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। यही कारण है कि अब इस पूरे मामले को मेडिकल कॉलेज में हुए एक बड़े वित्तीय घोटाले के रूप में देखा जा रहा है।
2023 का पत्र बना सबसे बड़ा सबूत
जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 का एक आधिकारिक पत्र सामने आया है, जिसमें तत्कालीन डीन द्वारा मेडिकल कॉलेज के 75 अधिकारियों, कर्मचारियों और बाबुओं से शपथ पत्र भरने के निर्देश जारी किए गए थे। बताया जा रहा है कि ये वही लोग थे, जिन्हें आयुष्मान योजना के तहत कथित रूप से नियमों के विरुद्ध राशि का भुगतान किया गया था। इस पत्र के सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली और उस समय पदस्थ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब भी बना हुआ है रहस्य
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जिन 75 अधिकारियों और कर्मचारियों को शपथ पत्र भरने के लिए कहा गया था, उनमें से कितनों ने वास्तव में दस्तावेज जमा किए थे। लेकिन इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद यह बात लगभग तय मानी जा रही है कि आयुष्मान योजना के नाम पर मेडिकल कॉलेज में भारी वित्तीय अनियमितता की गई थी।
जांच की मांग तेज, कई बड़े नाम आ सकते हैं सामने
मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर अब इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। कयाय लगाए जाने लगे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच अगर हुई तो कई बड़े नाम भी इस घोटाले में सामने आ सकते हैं।
ये है मामला
जानकारी के अनुसार पूरा मामला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वर्ष 2021 से 2022 के बीच का है जिस समय तत्कालीन डीन डॉ गीता गुईन थीं। आरोप है कि इन्होंने नियम विरूद्ध तरीके से शासन से मिलने वाली आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि को वितरित किया है। नियमायुसान ये प्रोत्साहन राशि मेडिकल की नर्स, वार्ड बॉय को मिलना चाहिए थी लेकिन डीन के हेरफेर के चलते ये राशि मेडिकल डीन, अधीक्षक कार्यालय के बाबुओं, लेखापाल को वितरित कर दी गई थी जिसके बाद आयुष्मान योजना की राशि का घोटाला उजागर हो गया था। मेडिकल के सूत्रों की माने तो भविष्य में कोई खतरा उत्पन्न न हो इसके लिए प्रोत्साहन राशि देने वालों से शपथ पत्र भी भरवाए गए थे।
ये लिखा है पत्र में ..
विगत 7-11-23 को तत्कालीन डीन डॉ. गीता गुईन के द्वारा जारी किए गए पत्र में स्पष्ट लिखा है कि नेताजी सुभाषचंद्र मेडिकल कॉलेज जबलपुर और संबंद्ध चिकित्सालयों में कार्यरत समस्त कर्मचारियों को सूचित किया जाता है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदाय की जाने वाली प्रोत्साहन राशि हेतु सभी कर्मचारी अपना अभिवचन पत्र आयुष्मान कार्यालय में उपलब्ध कराएं जिसके बाद ही प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
इनका कहना है
— आयुष्मान भारत योजना की प्रोत्साहन राशि के घोटाले को लेकर दस्तावेजों व अन्य पहलुओं की बारीकी से जांच करने जांच कमेटी का गठन जल्द किया जाएगा और जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
–डॉ. नवनीत सक्सेना, डीन, मेडिकल कॉलेज जबलपुर

Next Post

अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर लगाए गंभीर आरोप, हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर सुनवाई से हटने की मांग: निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं होने का दावा

Wed Apr 15 , 2026
नई दिल्ली | दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ एक नया और बेहद चौंकाने वाला हलफनामा दाखिल किया है। केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि जस्टिस शर्मा के दोनों बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अधीन काम करते हैं, जो […]

You May Like