गड़करी का मंत्र: ज्ञान को संपत्ति में बदलें किसान, तकनीक और नवाचार से ही बदलेगा भविष्य

रायसेन। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज कहा कि देश के अन्नदाता किसान अब ऊर्जादाता भी बन रहे हैं। गडकरी ने यहां आयोजित तीन दिवसीय “उन्नत कृषि महोत्सव-2026” के समापन समारोह में यह बात कही। केंद्रीय कृषि किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में इस समारोह का समापन हुआ। इस अवसर पर कई राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक कृषि बाजार से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधि और किसान उपस्थित थे।

इस मौके पर श्री गडकरी ने सड़क विकास, कृषि तकनीक, जल संरक्षण, वैकल्पिक ऊर्जा और ग्रामीण समृद्धि का व्यापक विजन रखा। उन्होंने कहा कि भारत के किसान अन्नदाता के साथ-साथ ईंधन दाता भी बन सकते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कृषि अपशिष्टों के इस्तेमाल से इथेनॉल, बिटूमिन और बिजली और गैस के उत्पादन के उदाहरण दिए।

श्री गडकरी ने कहा कि वे इस कार्यक्रम में मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि किसान के रूप में आए हैं। खेती का भविष्य अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वेदर स्टेशन, सैटेलाइट आधारित सूचना, ड्रोन, नैनो यूरिया और आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ चुका है, इसलिए किसानों को समय के साथ बदलना होगा। ज्ञान सबसे बड़ी शक्ति है और इस शक्ति को संपत्ति में बदलना आज कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने किसानों से नवाचार, अनुसंधान , सफल प्रयोगों और तकनीक-आधारित खेती को अपनाने का आह्वान किया, ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन संभव हो सके।

उन्होंने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा दाता, ईंधन दाता, हवाई ईंधन दाता, डामर दाता और हाइड्रोजन दाता भी बनेगा। उन्होंने कहा कि कृषि अवशेष, पराली, बायोमास, इथेनॉल, सीएनजी और हाइड्रोजन के माध्यम से किसानों के लिए आय के नए रास्ते खुलेंगे, आयात घटेगा और गांवों की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी। जल संरक्षण और भूगर्भ जल के स्टार को बढ़ाने के उपाय अपनाने पर विशेष बल देते हुए उन्होंने कहा कि दौड़ते हुए पानी को चलने के लिए, चलने वाले पानी को रुकने के लिए और रुके हुए पानी को जमीन को पिलाने के लिए लगाना होगा।

उन्होंने डेयरी, मत्स्य पालन और समुद्री संसाधनों पर आधारित अर्थव्यवस्था को किसानों की आय बढ़ाने के बड़े माध्यम बताते हुए कहा कि इनका उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्रोसेसिंग प्लांट, कोल्ड स्टोरेज, प्री-कूलिंग सिस्टम और वैल्यू एडिशन की मजबूत व्यवस्था भी बनानी होगी। उन्होंने कहा कि जब बाजार में उत्पादन अधिक होता है तो कीमतें गिर जाती हैं, इसलिए भंडारण और प्रसंस्करण की मजबूत व्यवस्था किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए आवश्यक है।

उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे मेले में लगे स्टॉल, मशीनरी प्रदर्शन, पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस, हाइड्रोपोनिक्स, एक एकड़ खेती के मॉडल, बकरी पालन, मछली पालन और अन्य तकनीकी सत्रों को देखकर जाएँ, सीखकर जाएँ और उसे खेत में लागू करें। यही ज्ञान, यही तकनीक और यही प्रयोग किसानों का भविष्य बदलेंगे, गांवों को समृद्ध बनाएंगे और स्मार्ट सिटी के साथ स्मार्ट विलेज की दिशा को मजबूत करेंगे।

श्री चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि “उन्नत कृषि महोत्सव” कोई कर्मकांड नहीं है और यह समापन नहीं, बल्कि नयी शुरुआत है। चार दिनों तक चले इस आयोजन ने किसानों के लिए पाठशाला का काम किया, जहाँ मिट्टी की महक, मशीन की शक्ति, नवाचार, तकनीक और विकास का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस क्षेत्र की माटी, जलवायु, जल उपलब्धता और संसाधनों के आधार पर बीज से बाजार तक का विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। इस रोडमैप में यह तय किया गया है कि इस क्षेत्र में कौन-कौन सी फसलें, फल और सब्जियाँ अच्छी हो सकती हैं और उनके उत्पादन, प्रोसेसिंग तथा मार्केटिंग की संपूर्ण योजना कैसे बनेगी।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि दलहन और बागवानी क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा, इस क्षेत्र को हॉर्टिकल्चर हब के रूप में विकसित किया जाएगा। अच्छे बीज की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए हर ब्लॉक में बीज ग्राम बनाए जाएंगे, दलहन और बागवानी क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा और इस क्षेत्र को हॉर्टिकल्चर हब के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ड्रिप और स्प्रिंकलर के माध्यम से पानी की एक-एक बूंद का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा तथा कस्टम हायरिंग सेंटर और पंचायतों में मशीन बैंक बनाए जाएंगे, ताकि किसानों को आधुनिक मशीनें आसानी से मिल सकें।

श्री चौहान ने कहा कि अच्छी नर्सरी और क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाएंगे, एफपीओ को मजबूत किया जाएगा, बैक हाउस और कोल्ड हाउस बनाए जाएंगे और किसानों को उत्पादन से बाजार तक बेहतर ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि एकीकृत खेती के मॉडल के माध्यम से छोटे खेत के टुकड़े पर भी अधिक आमदनी प्राप्त की जा सकती है और सरकार किसानों की आय बढ़ाकर ही चैन की सांस लेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे रोडमैप की मॉनिटरिंग के लिए टास्क फोर्स बनाई जाएगी तथा राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की टीमें मिलकर यह सुनिश्चित करेंगी कि जो संकल्प लिए गए हैं, वे केवल घोषणा बनकर न रह जाएँ, बल्कि पूरी ताकत के साथ जमीन पर उतरें।

श्री चौहान ने किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील करते हुए कहा कि भविष्य में खेती से जुड़ी अनेक सेवाएँ, योजनाएँ और प्रक्रियाएँ इससे आसान होंगी। कृषि मंत्री चौहान ने इस अवसर पर बीज से बाजार तक तैयार रोडमैप को जमीन पर उतारने का दृढ़ संकल्प दोहराया।

क्षेत्र में संपर्क सुविधाओं के विकास के संबंध में रखी गई रखी गई श्री चौहान की क्षेत्रीय मांगों पर श्री गडकरी ने रायसेन रिंग रोड और पूर्वी बायपास के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने, संबंधित डीपीआर तैयार करने, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा बढ़ाए जाने तथा पुलों के सौंदर्यीकरण संबंधी मांगों पर सकारात्मक सहमति व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य सड़क संबंधी प्रस्तावों पर भी जो संभव सहयोग होगा, वह किया जाएगा।

समापन सत्र में किसानों को हितलाभों का वितरण भी किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री करण सिंह वर्मा, नारायण सिंह पवार, नरेंद्र शिवाजी पटेल, सांसद दर्शन सिंह चौधरी कुछ और जनप्रतिनिधि मंच पर उपस्थित थे।

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