बरकतउल्ला विवि के कुलगुरु व कुलसचिव से जवाब तलब, वेतन बंद किये जाने का मामला

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से पूछा है कि याचिकाकर्ता का मामला लंबित है तो वेतन देना क्यों बंद कर दिया गया। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने विवि के कुलगुरु व कुलसचिव को इस संबंध में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले पर अगली सुनवाई 6 अप्रैल वाले सप्ताह में होगी।

भोपाल निवासी शैलेश तांबेकर की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता ने नियमितिकरण के लिए याचिका दायर की थी। फिलहाल उसे जून 2025 से वेतन नहीं दिया जा रहा है। बताया गया कि विवि में कुल 560 नियमित पद हैं, जिनमें से 418 शासन से स्वीकृत हैं। शेष नियमित को विवि अपने स्रोत से भुगतान करता है। याचिकाकर्ता के संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता ने भी राय दी थी कि उन्हें नियमित करें। इसके बाद राज्यपाल ने भी लीगल ओपीनियन के अनुसार निर्णय लेने की अनुशंसा की थी। इसी बीच विवि ने याचिकाकर्ता की सेवा समाप्त कर दी, लेकिन बाद में वो आदेश निरस्त कर दिया। दलील दी गई कि याचिका के लंबित रहने के दौरान 23 लोगों को नियमित किया गया। याचिकाकर्ता के समक्ष यह शर्त रख दी कि यदि वह याचिका वापस लेता है तो उसके मामले में विचार किया जाएगा। कोर्ट को बताया गया कि जून 2025 से याचिकाकर्ता का वेतन रोक दिया गया है, इसलिए अंतरिम आवेदन पेश किया गया। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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Sat Apr 4 , 2026
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