सीहोर/आष्टा। जिले के जावर क्षेत्र में पुलिस ने अवैध डीजल भंडारण और मिलावट के बड़े खेल का खुलासा किया है. टीन शेड के गोदाम से हजारों लीटर डीजल व कैमिकल जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है.
इंदौर-भोपाल फोरलेन स्थित दरखेड़ा जोड़ के पास जावर पुलिस ने रविवार देर रात छापामार कार्रवाई करते हुए अवैध डीजल के बड़े भंडार का खुलासा किया. पुलिस ने एक टीन शेड से 32 छोटे-बड़े ड्रमों में भरा 4825 लीटर डीजल जब्त किया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 4 लाख रुपए आंकी गई है. मौके से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जबकि उसके दो साथी मौका पाकर फरार हो गए.
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी दीप सिंह निवासी जरखी, थाना सुंदरसी, जिला शाजापुर है. आरोपी ने हाईवे किनारे टीन शेड बनाकर अवैध रूप से डीजल भंडारण का ठिकाना बना रखा था. प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर टैंकरों से सस्ता या संदिग्ध डीजल खरीदता था और उसमें केमिकल मिलाकर उसे दोबारा बाजार में बेचने भेजा जाता था. पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी ने अपने दो साथियों के नाम जुगल जायसवाल और यश जायसवाल बताए, जो आष्टा क्षेत्र के निवासी हैं. दोनों आरोपी फिलहाल फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में सरगर्मी से जुटी हुई है.
गौरतलब है कि सीहोर जिले में हर महीने करीब 11 हजार किलोलीटर डीजल और 5600 किलोलीटर पेट्रोल की खपत होती है. जिले में लगभग 140 पेट्रोल पंप संचालित हैं, जहां से ईंधन की आपूर्ति होती है. ऐसे में जब ईंधन की कृत्रिम कमी देखने को मिल रही है तो ऐसे मिलावटखोर व जमाखोर सक्रिय हो गए हैं.
इस मामले में थाना प्रभारी हेमंत पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि विश्वसनीय सूत्रों से अवैध डीजल भंडारण की सूचना मिलने पर कार्रवाई को अंजाम दिया गया है. मौके से जब्त किए गए डीजल और संदिग्ध केमिकल की जांच कराई जा रही है. मामले के फरार आरोपियों की तलाश सरगर्मी से जारी है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है.
बाहर से छोटा दिखता टीनशेड अंदर से था काफी बड़ा
कार्रवाई के दौरान पुलिस को यह देखकर हैरानी हुई कि बाहर से छोटा दिखाई देने वाला टीन शेड अंदर से काफी बड़ा निकला. उसके भीतर दो और हिस्से बनाए गए थे, जहां बड़ी मात्रा में ड्रमों में डीजल भरा हुआ रखा गया था. इससे साफ है कि यह कारोबार लंबे समय से सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था. जब्त किए गए 32 ड्रमों में से करीब 16 ड्रमों में केमिकल होने का अंदेशा जताया जा रहा है. पुलिस का मानना है कि डीजल की गुणवत्ता बदलने और उसे असली जैसा दिखाने के लिए मिलावट की जाती थी. हालांकि, असल स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
पेट्रोलियम पदार्थ की कमी का उठाया फायदा
युद्ध के कारण अभी डीजल और पेट्रोल को लेकर काफी मारामारी चल रही है. हाल के दिनों में डीजल और पेट्रोल की मांग बढऩे तथा कुछ पेट्रोल पंपों के अस्थायी रूप से ड्राय होने की स्थिति का फायदा उठाकर ऐसे गिरोह सक्रिय हो गए थे. एक साथ बड़ी संख्या में लोग पेट्रोल-डीजल लेने पंपों पर पहुंचने से आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई, जिसका लाभ अवैध कारोबारियों ने उठाया. दूसरी तरफ कई गिरोह जो पहले से काम कर रहे थे, वह भी सक्रिय हो गए थे.
आसपास के जिलों भी गिरोह की सक्रियता
पुलिस को संदेह है कि यह गिरोह केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों तक सक्रिय था. हाल ही में राजगढ़ जिले में हुई कार्रवाई से मिले सुरागों के आधार पर ही जावर पुलिस ने यह छापा मारा. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यहां से तैयार किया गया डीजल राजगढ़ सहित अन्य क्षेत्रों में सप्लाई किया जाता था.
कुछ इस तरह खेला जाता है मिलावट का खेल
जानकारों के अनुसार संदिग्ध या कम गुणवत्ता वाले ईंधन को असली डीजल जैसा दिखाने के लिए उसमें नेफ्था, लो-ग्रेड ऑयल, सॉल्वेंट या थिनर जैसे पदार्थ मिलाए जाते हैं. कभी-कभी रंग (डाई) भी मिलाया जाता है ताकि ईंधन का रंग असली जैसा लगे. यह पूरी प्रक्रिया गैरकानूनी और बेहद खतरनाक होती है, जिससे वाहनों के इंजन को नुकसान, माइलेज में गिरावट और प्रदूषण में बढ़ोतरी होती है.
