राधा कृष्ण मंदिर की जमीन के कब्जा मुक्त होने की उम्मीद

उज्जैन: चिमनगंज मंडी थाने के पीछे आगर रोड पर स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर की बेशकीमती जमीन को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद अब सुलझने की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है. करोड़ों रुपये मूल्य की इस जमीन पर स्वामित्व, कब्जे और राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है. अप्रैल के प्रथम सप्ताह में इंदौर हाई कोर्ट में अंतिम सुनवाई होगी.

राधा कृष्ण मंदिर की जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. पुजारी के निधन के बाद उनके वारिसों द्वारा न्यायालय में दावा प्रस्तुत किया गया था, जिसके बाद से इस प्रकरण में लगातार स्टे आदेश प्रभावी रहा. इसी कारण प्रशासनिक स्तर पर जमीन को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही थी.

कोर्ट ने कहा सरकार अपनी जमीन बचाए
इस बीच इंदौर हाई कोर्ट ने मार्च माह में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि जहां भी सरकारी या सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अवैध कब्जा है, वहां से अतिक्रमण हटाकर जमीन को पुनः शासन के नियंत्रण में लिया जाए. न्यायालय ने यह भी कहा है कि ऐसी जमीनों का उपयोग जनहित की योजनाओं के लिए किया जाना चाहिए.

दस्तावेजों में हेराफेरी की जांच
चिमनगंज मंडी थाना क्षेत्र के पीछे स्थित राधा कृष्ण मंदिर ट्रस्ट की यह जमीन भी इसी संदर्भ में प्रशासन की प्राथमिकता में आ गई है. बताया जा रहा है कि जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी कर स्वामित्व को लेकर विवाद खड़ा किया गया था. इस मामले में कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम स्तर पर विस्तृत जांच कराई जा रही है. राजस्व रिकॉर्ड की पड़ताल के साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि किन परिस्थितियों में जमीन का नामांतरण या प्रविष्टियां बदली गईं.

मौके पर कट गई झुग्गी एवेन्यू
यह जमीन बेहद महत्वपूर्ण और व्यावसायिक दृष्टि से बेशकीमती मानी जा रही है. इसी कारण समय के साथ यहां पर कई लोगों द्वारा कब्जा करने की कोशिश भी की गई. मंदिर समिति और जिला प्रशासन जहां कोर्ट में आमने-सामने की लड़ाई लड़ रहा है इसी बीच मौके पर झुग्गी एवेन्यू कट गई, लोगों ने झोपड़ियां बनाकर अतिक्रमण भी कर लिया गया था. प्रशासन अब पूरे मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बाद जमीन को मुक्त कराने की तैयारी में है.

छुट्टियों से टला मामला
यह मामला फिलहाल इंदौर हाई कोर्ट में विचाराधीन है. न्यायालय में इसकी अंतिम सुनवाई अप्रैल के पहले सप्ताह में होने की संभावना है. अदालत की छुट्टियों के कारण फिलहाल सुनवाई टल गई है, लेकिन अगली तारीख पर इस प्रकरण में महत्वपूर्ण निर्णय आने की उम्मीद जताई जा रही है. यदि न्यायालय का निर्णय प्रशासन के पक्ष में आता है तो जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराकर पुनः मंदिर समिति या शासन के अधिकार में दर्ज करने की प्रक्रिया तेज हो सकती है.

खाली जमीन पर बनेगी जनहित की योजना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही कह चुके हैं कि आगामी सिंहस्थ अब तक का सबसे भव्य आयोजन होगा, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु, साधु-संत और निवेशक उज्जैन पहुंचेंगे. ऐसे में शहर में मौजूद सरकारी और सार्वजनिक जमीनों को कब्जे से मुक्त कराकर उन्हें योजनाबद्ध विकास के लिए उपयोग में लाने की दिशा में सरकार और प्रशासन सक्रिय नजर आ रहे हैं.

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