पेटलावद: नगर परिषद के ट्रेचिंग ग्राउंड की बदहाली इन दिनों बेजुबान गोवंश के लिए काल साबित हो रही है। यहाँ चारों ओर बिखरे कचरे के ढेरों के बीच बड़ी संख्या में गोवंश विचरण करते देखे जा सकते हैं, जो भूख मिटाने के चक्कर में जहरीले प्लास्टिक को अपना निवाला बना रहे हैं।जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण यह क्षेत्र अब डंपिंग यार्ड के बजाय गोवंश के लिए असुरक्षित चारागाह में तब्दील हो चुका है।
समस्या की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती। बढ़ती गर्मी और सूखे कचरे के कारण इन ढेरों में रह-रहकर आगजनी की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। धधकती आग और जहरीले धुएं के बीच फंसा गोवंश किसी भी समय बड़े हादसे का शिकार हो सकता है। कचरे के बीच उठती लपटें न केवल पर्यावरण को दूषित कर रही हैं, बल्कि वहां मौजूद मवेशियों के जीवन पर भी सीधा खतरा पैदा कर रही हैं। विडंबना यह है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद न तो नगर परिषद प्रशासन हरकत में आया है और न ही जीवदया के नाम पर काम करने वाली समाजसेवी संस्थाएं इस ओर ध्यान दे रही हैं।
क्षेत्रीय लोगों में इस बात को लेकर खासा आक्रोश है कि जहाँ एक ओर गोसेवा की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी ओर पेटलावद के इस मैदान में गोवंश नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। यदि जल्द ही कचरा प्रबंधन की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई और गोवंश के लिए घेराबंदी या सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए, तो यहाँ किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन और बेपरवाह बनी संस्थाओं की यह चुप्पी अब बेजुबानों की जान पर भारी पड़ रही है।
