लॉजिस्टिक्स को सुरक्षित करने के लिए स्वदेशी कोल्ड-चेन तकनीक विकसित करनी होगी: फिक्की–ग्रांट थॉर्टन रिपोर्ट

नई दिल्ली, 19 मार्च (वार्ता) शीर्ष उद्योग मंडल फिक्की और ग्रांट थॉर्टन इंडिया की गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत को आयातित कोल्ड-चेन तकनीक पर निर्भरता कम करने के लिए इसे घरेलू परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करने तथा इसके लिए अपने रोबोटिक्स, सेंसर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरण विकसित करने की सलाह दी गयी है। भारत के लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र का काया कल्प: भंडारगृह, कोल्ड-चेन और प्रौद्योगिकी की भूमिका विषय पर फिक्की के गतिशक्ति शीर्ष सम्मेलन में प्रस्तुत इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कोल्ड-चेन ऑटोमेशन के लिए एक राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास केंद्र की स्थापना, क्षमता निर्माण से आगे बढ़कर प्रणाली की प्रभावशीलता की दिशा में एक निर्णायक बदलाव होगा। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 13 -14 प्रतिशत से घटाकर लगभग 7.9 प्रतिशत तक आ गयी है जो एक बड़ी सफलता है। इसमें प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के लिए स्वदेशी कोल्ड-चेन तकनीक विकास करने पर बल दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार देश में इस समय 8,815 कोल्ड स्टोरेज इकाइयाँ हैं, जिनकी कुल क्षमता 402.18 लाख टन है। इसके बावजूद कटायी-तोड़ाई के बाद फलों और सब्जियों का नुकसान 6 से 15 प्रतिशत तक ऊंचा बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार इसका कारण केवल बुनियादी ढांचे की कमी नहीं, बल्कि अपर्याप्त ऑटोमेशन, आपूर्ति श्रृंखला की खंडित योजना और भंडारण तथा परिवहन की स्मार्ट प्रणालियों का सीमित उपयोग है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र में स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास क्षमता विकसित करने से पूंजीगत लागत कम होगी, ऊर्जा-कुशल मॉडल विकसित होंगे और वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता घटेगी। सम्मेलन में नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं ने भी स्वदेशी नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। वेयरहाउसिंग विकास एवं नियामक प्राधिकरण की अध्यक्ष अनिता प्रवीण ने भारत की इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउसिंग रसीद प्रणाली (भंडार गृह की हस्तांतरीय इलेक्ट्रानिक रसीद) को सरकारी भंडारण क्षमता बढ़ाने का एक सरल और प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि पंजीकृत गोदामों में उत्पाद रखने वाले किसान अपनी रसीदों के आधार पर ऋण प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उन्हें फसल कटाई के समय मजबूरी में कम कीमत पर बिक्री से बचाया जा सकेगा।
फिक्की के सह-अध्यक्ष अंशुमान सिंह ने बताया कि भारत में वर्तमान में 50 करोड़ वर्ग फुट लॉजिस्टिक्स पार्क हैं, जिनमें से 25 करोड़ वर्ग फुट उच्च-स्तरीय (ग्रेड-ए) और संगठित क्षेत्र में है। उन्होंने अनुमान लगाया कि अगले पाँच वर्षों में यह बढ़कर 100 करोड़ वर्ग फुट से अधिक हो जाएगा, जिसे पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क पहल से बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रिमंडल द्वारा पिछले दिनों स्वीकृत 33,660 करोड़ रुपये की ‘भव्य योजना’ 100 प्लग-एंड-प्ले लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित कर भारत को बुनियादी ढांचे में आत्मनिर्भर बनाएगी। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के संयुक्त सचिव पंकज कुमार ने कहा कि भारत में लॉजिस्टिक्स लागत कम हुई है लेकिन दक्षता केवल लागत तक सीमित नहीं है—मजबूती, स्थिरता और हितधारकों के परिणाम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने ‘समन्वय की कमी’ का उल्लेख करते हुए उद्योग से पीएम गतिशक्ति पोर्टल का उपयोग समन्वित अवसंरचना योजना के लिए करने का आह्वान किया। फिक्की की लॉजिस्टिक्स समिति की सह-अध्यक्ष पाली त्रिपाठी ने ‘लास्ट-माइल’ कार्यान्वयन को सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि अगला चरण तेज और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने का है, जहाँ डेटा उपलब्धता से आगे बढ़कर डेटा की गति और एकीकृत निर्णय-निर्माण पर ध्यान दिया जाएगा। नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन प्रबंध निदेशक एवं सीईओ रजत कुमार सैनी ने कहा कि बुनियादी ढांचे में निवेश के साथ-साथ श्रमबल का औपचारिकरण, नियामकीय सुधार और कौशल विकास भी आवश्यक है।

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