अब स्टेशन के नामकरण को लेकर भाजपा में उठे अलग अलग सुर

ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे

ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर इन दिनों पुनर्निर्माण एवं सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। सिंधिया से लेकर सांसद भारत सिंह तक के एजेंडा में स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों को जल्द से जल्द पूरा कराना नंबर एक पर है लेकिन यह प्रोजेक्ट विलंबित होता जा रहा है। लगभग 535 करोड़ की लागत से चल रहे ये काम सितंबर 2026 तक पूरा होने का लक्ष्य है। इस विश्वस्तरीय स्टेशन का निर्माण कार्य धीमी प्रगति के कारण कई बार आगे बढ़ाया जा चुका है, अब दावा किया जा रहा है कि जून 2026 तक काम पूरा करने की तैयारी है। ग्वालियर का यह ऐतिहासिक स्टेशन कितनी जल्दी रानी कमलापति जैसा फाइव स्टार स्वरूप लेगा, इस चिंता के बजाए ग्वालियर के जनप्रतिनिधि अब स्टेशन के नामकरण पर उलझ गए हैं।

सांसद भारत सिंह कुशवाह ने लोकसभा में रेल मंत्री से मांग कर दी कि स्टेशन का नामकरण पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटलबिहारी वाजपेयी की स्मृति में हो। यह खबर आते ही सिंधिया खेमे ने स्टेशन का नामकरण स्व. माधवराव सिंधिया के नाम पर रखे जाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। भाजपा के दो खेमे आमने सामने आए तो क्षत्रिय समाज भी मैदान में कूद पड़ा है। क्षत्रिय समाज का कहना है कि न माधव और न अटल, स्टेशन का नामकरण तो राजा मानसिंह तोमर के नाम पर होना चाहिए क्योंकि ग्वालियर की असल पहचान तो राजा मानसिंह की वजह से ही है। अब देखना है कि रेल मंत्रालय किस नाम पर मोहर लगाता है…।

प्रदेश में अब तक नहीं लगा इतना विशाल मेडिकल कैंप, रचा इतिहास

अपने अपने क्षेत्र के माहिर देशभर के दिग्गज डॉक्टर एक ही शहर में पूरे आठ दिन तक मौजूद रहकर खुद को पीड़ित मानवता की सेवा के लिए समर्पित कर दें और बड़े शहरों में जिन डॉक्टरों के अप्वाइंटमेंट महीनों तक नहीं मिलते, आधुनिक युग के वे भगवान मरीजों की सेवा के लिए फौरन हाजिर मिलें, मेडिकल क्षेत्र के विशुद्ध प्रोफेशनल हो जाने के चलते ऐसे वाकये कम ही मिलते हैं लेकिन शिवपुरी ने तो इतिहास ही रच दिया है। माधवराव सिंधिया सेवा स्वास्थ्य मिशन और रोटरी रीजनल मेडिकल मिशन इन दिनों शिवपुरी में पीड़ित मानवता की सेवा का नया इतिहास रचने जा रहा है। इस शिविर का आगाज खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया।

सोमवार को नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर का शुभारंभ किया। शिविर का आगाज ही बेमिशाल रहा, जब 5260 दिव्यांगजनों को 22,475 सहायक उपकरण और बैटरी वाली ट्राइसाइकिल बांटी गईं। खास बात यह कि सिंधिया ने दिव्यांगजनों को स्वयं अपने हाथों से उपकरण दिए। दरअसल, जरूरतमंद तबके तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने की यह परंपरा स्व. माधवराव सिंधिया ने शुरू की थी जिसे उनके पुत्र आगे बढ़ा रहे हैं। इस मैराथन कैंप में दिल्ली और भोपाल के एम्स से डॉक्टर आए हैं तो रोजाना 25 हजार ओपीडी और 500 से 700 ऑपरेशन करने के भी इंतजाम हैं। जाहिर है कि मप्र का यह अब तक का सबसे बड़ा मेडिकल कैंप है। हालांकि रोटरी क्लब करीब छह साल पहले मुरैना में भी इसी तरह का कैंप लगा चुका है।

मिडिल ईस्ट की जंग के ग्वालियर में साइड इफेक्ट
ग्वालियर से ईरान की दूरी करीब पौने तीन हजार किमी है लेकिन वहां की जमीन पर भड़की जंग से ग्वालियर चंबल अंचल भी प्रभावित है। मिडिल ईस्ट की जंग का असर एलपीजी की किल्लत और सभी गैस एजेंसियों पर लगी लोगों की भीड़ की शक्ल के रूप में सामने आया है। वैकल्पिक साधनों के रूप में बाजार में इंडक्शन कुकर और इलेक्ट्रिक भट्ठियों की इतनी खरीद हुई कि बाजार से ऑफ स्टॉक हो गईं। लकड़ी, कण्डों और कोयले से जलने वाले चूल्हों का दौर फिर लौट आया। एलपीजी का संकट बढ़ा तो विपक्षी दलों को जनभावनाओं से जुड़ा गर्मागर्म मुद्दा हाथ लग गया और डेढ़ साल बाद होने वाले नगर निगम चुनाव के लिए खुद को फिट और जनता का हिमायती साबित करने की तैयारी में जुटे कार्यकर्ता डंडे झंडों के साथ चौराहों पर कूद पड़े। एलपीजी की सप्लाई को निर्बाध बनाए रखने के लिए प्रशासन को कुछ ज्यादा ही मशक्कत करना पड़ी। मनमानी करने पर आमादा गैस एजेंसियों को कार्रवाई का डर दिखाया गया। अंततः हालात अब काबू में हैं। एलपीजी की किल्लत से जुड़ी शिकायतों में पचास फीसदी की कमी आई है लेकिन यह आशंका बनी हुई है कि जंग लंबी खिंची तो पेट्रोल डीजल की सप्लाई और कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं।

असम विजय के लिए पीतांबरा नगरी में मनौती

हर साल ग्वालियर अंचल से हजारों की संख्या में देवीभक्त असम जाकर कामाख्या देवी के मंदिर में मनौतियां मांगते हैं, लेकिन असम में विधानसभा चुनाव का ऐलान होते ही वहां के सीएम हिमंत विश्व शर्मा ने दतिया आकर मां पीतांबरा पीठ पर देवी की पूजा अर्चना कर चुनाव में अपनी पार्टी की विजय और फिर से सरकार बनने की मनौती मांगी। वादा कर गए हैं कि चुनाव के बाद फिर से पीतांबरा नगरी में आएंगे। जाते जाते भरोसे के साथ यह भी कह गए कि पूर्वोत्तर के इस सूबे में फिर से कमल खिलेगा। सरकार किसकी बनेगी और किसकी नहीं, यह तो असमिया ही तय करेंगे। बहरहाल, असम के सीएम के आगमन के चलते पीतांबरा नगरी में सुरक्षा के जबरदस्त इंतजाम रहे और सियासत भी सरगर्म रही।

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