इंदौर: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने लगभग दो सप्ताह की देरी के बाद बुधवार को एमबीए प्रथम सेमेस्टर का परिणाम घोषित कर दिया. विश्वविद्यालय द्वारा पहले कमजोर प्रदर्शन के चलते रिजल्ट रोक लिया गया था और दोबारा मूल्यांकन कराया गया, लेकिन इसके बावजूद परिणामों में खास सुधार नहीं देखा गया.रीवैल्यूएशन, स्टेप मार्किंग और ग्रेस मार्क्स देने के बाद पास प्रतिशत 24′ से बढ़कर 27′ तक पहुंचा, जो अब भी संतोषजनक नहीं माना जा रहा है. एमबीए कोर में 10 हजार से अधिक छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिनमें से केवल करीब 2,700 छात्र ही सफल हो सके.
मार्केटिंग में सबसे खराब स्थिति
एमबीए मार्केटिंग मैनेजमेंट का परिणाम सबसे चिंताजनक रहा. यहां 600 से अधिक परीक्षार्थियों में से मात्र 30 छात्र ही पास हो सके. पास प्रतिशत 4′ से बढ़कर केवल 7′ तक पहुंच पाया. वहीं, एमबीए फाइनेंशियल एडमिनिस्ट्रेशन में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला. इस कोर्स में 150 छात्रों में से 42 छात्र पास हुए, जिससे पास प्रतिशत 25′ से बढ़कर 36′ तक पहुंच गया.
न्यूमेरिकल विषय बने बड़ी चुनौती
परीक्षा नियंत्रक डॉ. आशीष तिवारी के अनुसार, मंटिटेटिव टेक्निक्स और अकाउंटिंग जैसे न्यूमेरिकल विषय छात्रों के लिए सबसे अधिक कठिन साबित हुए. यही कारण रहा कि कई कोर्स में परिणाम कमजोर रहे.
देरी से बढ़ी छात्रों की चिंता
रिजल्ट में देरी के चलते छात्रों में असमंजस की स्थिति बनी रही. हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एमबीए द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं 12 मई से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित की जाएंगी.
