इंदौर: मध्यप्रदेश शासन ने वर्ष 2018 में प्रदेश में आधुनिक और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाएं शुरू करने का निर्णय लिया था. इसके तहत इंदौर, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में चार सुपर स्पेशलिटी चिकित्सालय स्थापित किए गए हैं.साथ ही इन शहरों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी विकसित किए गए हैं, जिनमें जबलपुर में पल्मोनरी मेडिसिन, ग्वालियर में न्यूरोलॉजी और इंदौर में नेत्र रोगों के उपचार की विशेष व्यवस्था की गई है. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया के अनुसार सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में बेहतर सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं. डॉक्टरों को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज तय किया गया है, जिसमें असिस्टेंट प्रोफेसर को 1.5 लाख, एसोसिएट प्रोफेसर को 2.5 लाख और प्रोफेसर को 3 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन निर्धारित किया गया है. साथ ही प्रतिवर्ष 8 प्रतिशत की कंपाउंडिंग दर से वेतन वृद्धि का प्रावधान भी रखा गया है.
इंसेंटिव देने की व्यवस्था
सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को प्रोत्साहित करने के लिए इंटरवेंशन और ऑपरेशन से प्राप्त राजस्व का 20 प्रतिशत तथा सायंकालीन पेड ओपीडी से होने वाली आय का 50 प्रतिशत तक इंसेंटिव देने की व्यवस्था की गई है. डॉक्टरों के लिए निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं होगी और उनका क्लीनिकल समय सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित किया गया है. इसके बाद शाम 5.30 से 6.30 बजे तक इवनिंग राउंड और 6.30 से 8.30 बजे तक सायंकालीन पेड ओपीडी का समय तय किया गया है.
मरीजों को राहत मिलेगी
सायंकालीन पेड ओपीडी का उद्देश्य उन मरीजों को सस्ती और बेहतर सुपर स्पेशलिटी सेवाएं उपलब्ध कराना है, जो निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवा रहे हैं. जहां निजी अस्पतालों में सुपर स्पेशलिस्ट ओपीडी की फीस 1000 से 3000 रुपये तक होती है, वहीं एमजीएम सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में यह सेवा केवल 600 रुपये में उपलब्ध होगी. इससे न केवल मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि इंदौर में मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है
