तेहरान | ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच ईरानी सेना ने अपनी गुप्त ‘मिसाइल सिटी’ के वीडियो जारी कर वैश्विक शक्तियों को चुनौती दी है। जमीन के नीचे मीलों लंबी सुरंगों में बनी इस सैन्य नगरी में लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलें, समुद्री खदानें और घातक आत्मघाती ड्रोनों का विशाल जखीरा मौजूद है। सरकारी टेलीविजन पर जारी फुटेज में इन हथियारों को ट्रेलरों पर हमले के लिए तैयार दिखाया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की यह ‘अंडरग्राउंड’ ताकत समुद्र में किसी भी बड़े बेड़े को पलक झपकते ही तबाह करने की क्षमता रखती है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुँच गया है।
ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ऐसे मानवरहित आत्मघाती ड्रोन तैनात किए हैं जो पानी की सतह के ठीक नीचे चलते हैं। अपनी बेहद छोटी बनावट के कारण ये ड्रोन अमेरिकी नौसेना के अत्याधुनिक रडार को चकमा देने में सक्षम हैं। हाल ही में ओमान के तट पर एक तेल टैंकर ‘एमकेडी वीवाईओएम’ पर हुए हमले ने इन ड्रोनों की मारक क्षमता को साबित कर दिया है। ये छोटे लेकिन विस्फोटक लदे ड्रोन सीधे जहाजों के इंजन रूम को निशाना बना रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि इन अदृश्य खतरों को रोकना फिलहाल उनकी नौसेना के लिए सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती बन गया है।
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसकी घेराबंदी जारी रही, तो वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल की आपूर्ति पूरी तरह ठप कर देगा। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस मार्ग के बंद होने से दुनिया भर में ईंधन की कीमतें $200 प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का पाँचवां हिस्सा इसी संकरे मार्ग से गुजरता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन और हूती विद्रोहियों की तरह ईरान भी अब ‘ड्रोन वॉरफेयर’ के जरिए इस जंग को मानवता के लिए एक बड़े आर्थिक संकट में बदलने की तैयारी कर चुका है।

