खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में बढ़ कर 10 महीने के उच्चतम स्तर 3.2 प्रतिशत पर

नयी दिल्ली, 12 मार्च (वार्ता) खाद्य पदार्थों, पर्सनल केयर के सामान और तम्बाकू श्रेणी की वस्तुओं के खुदरा भावों तेजी के चलते देश में खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी माह में बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गयी। यह पिछले 10 महीनों में खुदरा मुद्रास्फीति का उच्चतम स्तर है।

विश्लेषकों के अनुसार यह वृद्धि मुख्य रूप से पर्सनल केयर उत्पादों, खाद्य पदार्थों और तंबाकू श्रेणी में कीमतें बढ़ने से है। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी खुदरा मूल्य सूचकांक के अनुसार फरवरी 2026 में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की खुदरा मुद्रास्फीति क्रमश 3.37 प्रतिशत और 3.02 प्रतिशत थी।

प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार इस साल फरवरी माह में खाद्य मुद्रास्फीति 3.47 प्रतिशत थी।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के ये आंकड़े नई श्रृंखला के तहत दूसरी बार आए हैं पर इस नयी श्रृंखला इस नई श्रृंखला के आधार पर फरवरी 2021 से मुद्रास्फीति के मुख्य दरों का आकलन किया जा सकता है। इससे पहले इससे ऊंची खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल 2025 में 3.3 प्रतिशत थी।

रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिती नायर के अनुसार जनवरी में खुदरा मुद्रास्फीति में 0.47 अंक की वृद्धि में लगभग 0.44 अंक की बढ़ोतरी केवल खाद्य और पेय श्रेणी में महंगाई के चलते हुई है। फरवरी में खाद्य और पेय पदार्थ श्रेणी में मुद्रास्फीति 3.35 प्रतिशत रही, जो जनवरी में 2.1 प्रतिशत थी। ‘पान, तंबाकू और नशीले पदार्थ’ श्रेणी में मुद्रास्फीति 2.9 प्रतिशत से बढ़कर 3.5 प्रतिशत हो गई।

इसी तरह पर्सनल केयर और अन्य उत्पादों के खंड में मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 19 प्रतिशत से अधिक बनी रही। फरवरी महीने में यह बढ़कर 19.6 प्रतिशत हो गई, जबकि जनवरी में 19.02 प्रतिशत थी।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि इस श्रेणी में तेज वृद्धि का मुख्य कारण सोना और चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी है।

खाद्य और ईंधन को छोड़कर कोर (मुख्य) मुद्रास्फीति जनवरी और फरवरी 2026 में 3.4 प्रतिशत पर स्थिर रही।

अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ईंधन आपूर्ति में बाधा आने से मार्च में महंगाई पर और दबाव पड़ सकता है।

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