रायपुर, 10 मार्च (वार्ता) छत्तीसगढ़ के पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ नए एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगाने और सभी लंबित मामलों में एक साथ जमानत देने की मांग की थी।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामले में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोप हैं और ऐसे में आरोपी को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना ही होगा।
दरअसल, टुटेजा पर आबकारी घोटाला, डीएमएफ, नान घोटाला, कस्टम मिलिंग और कोल से जुड़े मामलों सहित कई गंभीर आरोप लगे हैं। हाल ही में उन्हें एक मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सभी मामलों में एक साथ जमानत देने और जांच एजेंसियों को एक साथ पूछताछ करने का निर्देश देने की मांग की थी। साथ ही उन्होंने नए मामलों में गिरफ्तारी पर रोक लगाने की भी अपील की थी।
इस याचिका पर सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्या बागची की खंडपीठ में हुई। टुटेजा की ओर से अधिवक्ता शोएब आलम ने दलील दी कि अप्रैल 2024 से वे जेल में हैं और जब भी किसी एक मामले में जमानत मिलने की स्थिति बनती है, जांच एजेंसियां उन्हें दूसरे मामले में गिरफ्तार कर लेती हैं। उन्होंने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन बताया।
हालांकि अदालत ने इन तर्कों से सहमति नहीं जताई। पीठ ने कहा कि यह मामला राजनीतिक प्रताड़ना का नहीं बल्कि सार्वजनिक धन से जुड़े गंभीर आरोपों का है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता लंबे समय तक सत्ता के करीब रहे हैं और अब उन्हें न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। अदालत के अनुसार भावनात्मक तर्क अलग बात है, लेकिन कानून के आधार पर ऐसी राहत नहीं दी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी मौजूदा और संभावित मामलों में अग्रिम रूप से जमानत देने का आदेश नहीं दिया जा सकता। हालांकि अदालत ने यह छूट दी कि यदि टुटेजा किसी मामले में गिरफ्तारी की आशंका महसूस करते हैं तो वे संबंधित अदालत में नियमित या अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि यदि टुटेजा एक सप्ताह के भीतर जमानत याचिका दाखिल करते हैं तो हाईकोर्ट उस पर दो से चार सप्ताह के भीतर प्राथमिकता से निर्णय करेगा।
