
खंडवा। विज्ञान और तकनीक के इस दौर में जहां दुनिया चांद पर घर बनाने की सोच रही है, वहीं मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक ऐसी हकीकत भी है जो रूह कंपा देती है। जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर सैलानी गांव में इन दिनों अदृश्य शक्तियों का मेला लगा है। होली से रंग पंचमी तक चलने वाले इस मेले को स्थानीय भाषा में भूतों का मेला कहा जाता है, जहां आस्था और अंधविश्वास के बीच की लकीर धुंधली पड़ जाती है।
लोहे की जंजीरें और आत्माओं का तांडव
सैलानी बाबा की दरगाह के इर्द-गिर्द का नजारा किसी डरावनी फिल्म के सीन जैसा होता है। देश के कोने-कोने से लोग अपने परिजनों को जंजीरों में बांधकर यहां लाते हैं। मान्यता है कि दरगाह की लोहे की चारदीवारी को छूते ही शरीर के भीतर छिपी बुरी शक्तियां तांडव करने लगती हैं। लोग अजीबोगरीब हरकतें करते हैं, चिल्लाते हैं और बाबा की चौखट पर अपने गुनाह कुबूल करते हैं।
सैलानी बाबा की
अदृश्य सजा
8 दरगाह के सेवादारों और श्रद्धालुओं का दावा है कि यहां बुरी आत्माओं की पेशी लगती है।
8 न्याय का विधान: बाबा सैलानी की शक्ति उन रूहों को सजा सुनाती है, जिसके बाद वे शरीर छोडऩे पर मजबूर हो जाती हैं।
8 अनोखी सजा: यह सजा शारीरिक नहीं बल्कि रूहानी होती है, जिसे केवल वह ‘शक्ति’ ही महसूस कर पाती है।
8 बलि की परंपरा: मन्नत पूरी होने या निजात पाने के लिए यहां मुर्गे और बकरे की बलि देने की भी प्राचीन परंपरा है।
87 सालों से जारी है अटूट आस्था :
महाराष्ट्र के बुलढाणा के फकीर मकदूम शाह सैलानी की याद में यह दरगाह करीब 87 साल पुरानी है। 1939 में स्थापित इस स्थान की सबसे बड़ी विशेषता सांप्रदायिक सौहार्द्र है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार आयोजित होने वाले इस मेले में हिंदू, मुस्लिम और अन्य सभी धर्मों के लोग समान आस्था के साथ पहुंचते हैं। हालांकि विज्ञान इसे मानसिक बीमारी या ‘हिस्टीरिया’ का नाम देता है, लेकिन यहां आने वाले हजारों लोगों का अटूट विश्वास तर्क पर भारी पड़ता है। लोग दुखी मन से आते हैं और सुकून के साथ वापस लौटते हैं।
