मुंबई | भारतीय उद्योग जगत के पितामह जमशेदजी नुसरवानजी टाटा की आज 187वीं जयंती मनाई जा रही है। 3 मार्च 1839 को गुजरात में जन्मे जमशेदजी ने मात्र 14 वर्ष की आयु में मुंबई आकर अपनी शिक्षा पूरी की और फिर 21,000 रुपये की मामूली पूंजी से अपना सफर शुरू किया। उनका मानना था कि व्यापार का मुख्य उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाना होना चाहिए। उन्होंने चिंचपोकली में एक पुरानी मिल को ‘अलेक्जेंड्रा मिल’ में बदलकर अपनी व्यापारिक कुशलता का लोहा मनवाया और भारतीय औद्योगिक क्रांति की ठोस नींव रखी।
जमशेदजी के जीवन के चार मुख्य लक्ष्य थे: एक स्टील प्लांट, एक विश्व स्तरीय शिक्षण संस्थान, एक शानदार होटल और एक हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर प्लांट। हालांकि वे अपने जीवनकाल में केवल ‘ताज महल पैलेस’ होटल का उद्घाटन ही देख पाए, जो 1903 में देश का पहला बिजली वाला होटल बना। उनके निधन के बाद उनके बेटों ने उनके बाकी सपनों को पूरा किया, जिसके परिणामस्वरूप टाटा स्टील, टाटा पावर और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) जैसे महान संस्थानों का जन्म हुआ। ये संस्थान आज भी भारत की वैज्ञानिक और औद्योगिक प्रगति की रीढ़ बने हुए हैं।
जमशेदजी टाटा न केवल एक सफल उद्यमी थे, बल्कि वे मजदूरों के अधिकारों के बड़े पैरोकार भी थे। उन्होंने आधुनिक श्रम कानूनों से दशकों पहले ही भविष्य निधि और कम काम के घंटों जैसी सुविधाएं शुरू कर दी थीं। उन्होंने ‘जमशेदपुर’ शहर की परिकल्पना एक ऐसे स्थान के रूप में की थी जहाँ चौड़ी सड़कें, बगीचे, अस्पताल और खेल के मैदान हों। भले ही वे 1904 में इस दुनिया से विदा हो गए, लेकिन उनके द्वारा बोई गई नैतिकता और परोपकार की संस्कृति आज भी टाटा समूह और आधुनिक भारत की पहचान बनी हुई है।

