तेहरान, 02 मार्च (वार्ता) ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद खाड़ी क्षेत्र में ईरानी हमलों ने व्यापारिक गतिविधियों में भारी व्यवधान उत्पन्न किया है।
रिपोर्टों के अनुसार यह स्थिति कोविड-19 महामारी के बाद से अब तक की सबसे खराब गिरावट है। इसके कारण हुए से नुकसान से क्षेत्र के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी भारी हलचल मचा दी है। इससे तेल की कीमतें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
यूएई, सऊदी अरब, बहरीन और कतर पर तेहरान के ये हमले शनिवार देर रात ईरान पर हुए अमेरिका-इजरायली संयुक्त हमले के जवाब में किये गये थे। उस हमले ने ईरान के राजनीतिक-सैन्य नेतृत्व के प्रमुख चेहरों को खत्म कर दिया है। इससे देश में सत्ता का बड़ा शून्य पैदा हो गया है।
इन जवाबी हमलों ने खाड़ी बाजारों को करारा झटका दिया है। क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ती असुरक्षा के कारण तेल की कीमतें बढ़ गयी हैं, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन कमजोर हुआ है और जहाजरानी पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
रविवार को जब कारोबार खुला तो खाड़ी देशों के शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट देखी गयी। सऊदी अरब का बेंचमार्क इंडेक्स खुलने पर चार प्रतिशत से अधिक गिर गया और 2.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। ओमान का बाजार 1.4 प्रतिशत और मिस्र का बाजार 2.5 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। दोनों ने हालांकि शुरुआती नुकसान की कुछ हद तक भरपाई की। सोमवार को शुरुआती कारोबार में कतर का इंडेक्स भी दो प्रतिशत नीचे था।
इस संकट ने वैश्विक बाजारों को भी हिला कर रख दिया है, क्योंकि ब्रेंट क्रूड सोमवार को उछलकर 78 डॉलर प्रति बैरल के ठीक ऊपर पहुंच गया, जबकि शुक्रवार को यह 72.87 डॉलर पर बंद हुआ था। एशियाई शेयरों में भी व्यापक गिरावट देखी गयी। इसमें भारत का सेंसेक्स 1.3 प्रतिशत, जापान का निक्केई 1.6 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग 1.8 प्रतिशत और ताइवान का बेंचमार्क इंडेक्स 0.9 प्रतिशत तक गिर गया। यूरोपीय शेयर भी इसी तरह प्रभावित हुए। जर्मनी का डैक्स 1.9 प्रतिशत गिरकर 24,817.42 पर आ गया, जबकि पेरिस में सीएसी 40 1.7 प्रतिशत टूटकर 8,435.80 पर बंद हुआ। ब्रिटेन का एफटीएसई 100 एक प्रतिशत फिसलकर 10,808.53 पर आ गया।
रविवार को यूएई का वित्तीय बाजार बंद रहता है, उसने सोमवार और मंगलवार को भी एक्सचेंज बंद रखने का दुर्लभ कदम उठाया। कुवैत रविवार को बंद था और उसने अगले आदेश तक ट्रेडिंग निलंबित कर दिया है।
तेल के अलावा एयरलाइंस और क्रूज ऑपरेटरों से लेकर वैश्विक होटल शृंखलाओं तक, पर्यटन और यात्रा क्षेत्र के शेयरों में भारी गिरावट आयी है। इसके साथ ही प्राकृतिक गैस वायदा में छह प्रतिशत तक की वृद्धि हुई और परिवहन के साथ-साथ औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किये जाने वाले ईंधन के वायदा भाव में 14 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया।
