जबलपुर: वन परिक्षेत्र सिहोरा के ग्राम घुघरा में स्थित मेसर्स निसर्ग इस्पात प्रा. लि. कंपनी परिसर में मृत अवस्था में मिले तेंदुआ व जंगली सुअर के शव के मामले में वन विभाग की जांच प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने के बाद थम सी गई है। एक यही प्रमुख वजह मानी जा रही है कि वन विभाग ने अभी तक तेंदुआ और जंगली सुअरों के शिकार के मामले में आरोपियों के नामों का खुलासा नहीं किया है।वन विभाग के सूत्रों की माने तो तेंदुए के शिकार मामले में कई अहम सुराग वन विभाग की टीम ने जुटा लिए हैं और अब वन विभाग जल्द ही संदिग्ध 7 से 8 लोगों के नाम कोर्ट में प्रस्तुत करने वाली है जिन्होनें तेंदुआ का शिकार किया था।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूरे मामले में दोषियों के रूप में कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम भी सामने आए हैं जिन्होंने इस कृत्य को अंजाम देने में कहीं न कहीं भूमिका निभाई थी। उधर हाल ही में जबलपुर पदस्थ हुए डीएफओ ने नवभारत को संकेत दे ही दिया कि जल्द ही कोर्ट में जांच पूरी कर संदिग्धों के नाम सार्वजनिक कर दिए जाएंगे। मतलब साफ है कि खनन व्यापारी और भाजपा विधायक के आपसी विवाद के चक्कर में जंगली सुअरों और तेंदुआ का शिकार किया जाता रहा और फिर साजिश के तहत एक दूसरे को फंसाने का क्रम चलता रहा। अब सवाल ये खड़े हो रहे हैं कि वन विभाग के प्रभावशील लोगों के नाम सामने आने के बाद उन पर सख्त एक्शन लेगा या फिर इनको बचाकर ले जाएगा, पूरी सुई अब डीएफओ पर टिकी हुई है।
ये है मामला
गौरतलब है कि विगत 24 अक्टूबर की रात को वन परिक्षेत्र सिहोरा के ग्राम घुघरा में स्थित मेसर्स निसर्ग इस्पात प्रा. लि. कंपनी के परिसर में झाड़ियों के बीच एक तेंदुआ मृत अवस्था में पाया गया था। इस दौरान घटना स्थल के पास से एक जंगली सुअर का शव भी बरामद किया गया था। पीएम जब हुआ तो पता चला कि तेंदुए का शिकार करंट लगाकर किया गया था। इस मौके पर वन विभाग को तेंदुए के 18 नाखून और 4 दांत गायब मिले थे। इसके अलावा करीब 3 माह पहले गौरहा-गंजताल रोड स्थित चितावर माता मंदिर के पास सड़क किनारे मादा तेंदुआ का शव मिला था जिस दौरान वन विभाग के जिम्मेदारों ने कहा था कि देा तेंदुओं की लड़ाई में मादा तेंदुआ की मौत हुई है।
सीएम तक पहुंच चुका है पत्र
वन परिक्षेत्र सिहोरा के ग्राम घुघरा में स्थित मेसर्स निसर्ग इस्पात प्रा. लि. कंपनी की ओर से दीपक कुलसानी के द्वारा सीएम डॉ. मोहन यादव को पत्र विगत 26 अक्टूबर 2025 को लिखकर भेजा गया था जिसमें मुख्यमंत्री को बताया गया था कि खनन व्यापारी व विधायक संजय पाठक का महेंद्र गोयनका से आपसी विवाद चल रहा है जिसको लेकर विधायक द्वारा साजिश के तहत तेंदुआ को कहीं और मरवाया और फिर निसर्ग कंपनी के परिसर में लाकर फेंक दिया। पत्र में कंपनी व महेंद्र गोयनका के द्वारा सीएम से ये मांग भी की गई कि तेंदुए के शिकार मामले की बड़ी से बड़ी जांच एजेंसी से जांच कराई जाए और जो भी दोषी हो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र सिहोरा के ग्राम घुघरा में स्थित मेसर्स निसर्ग इस्पात प्रा. लि. कंपनी की खदान करीब 250 एकड़ में फैली हुई है और ये जमीन महेंद्र की पत्नि के नाम पर दर्ज है।
इसलिए खड़े हो रहे सवाल
सिहोरा के ग्राम घुघरा में स्थित मेसर्स निसर्ग इस्पात प्रा. लि. कंपनी के पास तेंदुआ के पग मार्क्स नहीं मिले हैं, इस इलाके में पिछले लंबे समय से तेंदुआ देखा ही नहीं गया है और कंपनी परिसर में लगी जाली एक जगह से कटी हुई वन विभाग को मिली है। खनन व्यापारी महेंद्र गोयनका के सामने आने के बाद आज तक पूरे मामले में विधायक संजय पाठक सामने नहीं आए और न ही इसको लेकर उन्होनें कोई बयान जारी किया जिसको लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि तेंदुआ चलकर आया होता तो उसके पैर के निशान वहां होते।
वीडियो जारी कर दी थी सफाई
जानकारी के अनुसार कुछ माह पहले महेंद्र गोयनका ने वीडियेा जारी करते हुए सफाई दी थी कि वे पिछले 3 साल से जबलपुर व सिहोरा में आए ही नहीं है और वे व उनकी पूरी फैमिली शाकाहारी है। वीडियो में उन्होंने साफ किया था कि विधायक संजय पाठक द्वारा साजिश रचकर उन्हें फंसाने का प्रयास किया जा रहा है।
इनका कहना है-
–वन विभाग के रडार में 7 से 8 लोग संदिग्ध हैं जिनको लेकर जांच प्रक्रियाधीन है। आईओ को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वो बिना किसी प्रभावशाली के दवाब के बिना मामले की निष्पक्षता से जांच करे और प्रतिवेदन सामने रखे। तेंदुए के शिकार के मामले में जल्द ही जांच पूरी कर कोर्ट में विभाग की तरफ से बताया जाएगा कि उनकी नजर में 7 से 8 संदिग्ध लोग कौन हैं।
पुनीत सोनकर, डीएफओ जबलपुर
