
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन एसोसिएट प्रोफेसर्स एवं सिस्टर ट्यूटर की चयन का रिजल्ट जारी करने पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले में राज्य सरकार और कर्मचारी चयन मण्डल को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।
यह मामला जबलपुर निवासी निशा चंदेल व अन्य की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता सुयश मोहन गुरू ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर्स के पद, ट्यूटर सिस्टर्स के पद प्रमोशन से भरने का नियम है, लेकिन राज्य सरकार ने इन्हें सीधी भर्ती से भरने का आदेश जारी किया है। कर्मचारी चयन मण्डल ने 24 दिसंबर 2025 को अधिसूचना जारी कर बीते दिनों भर्ती परीक्षा भी करवा ली है। दरअसल, राज्य सरकार ने पूर्व में अधिसूचना जारी कर असिस्टेंट प्रोफेसर और सिस्टर ट्यूटर की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया। इसके बाद 25 जनवरी को दूसरा विज्ञापन जारी किया, जिसमें से सिस्टर ट्यूटर को हटा दिया गया और एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती निकाली। इस पर सिस्टर ट्यूटर की ओर से हाईकोर्ट मे याचिका दायर की गई। आवेदकों की ओर से कहा गया कि एसोसिएट प्रोफेसर बनने के लिए वे पात्र हैं। भर्ती नियम 2024 के अनुसार एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती 100 प्रतिशत तक प्रमोशन से ही होना है, इसलिए सीधी भर्ती जो निकाली गई है, वह गैरकानूनी है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त अंतरिम आदेश देते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
