कोलकाता, (वार्ता) पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मोनोज अग्रवाल ने सोमवार को कानून-व्यवस्था की स्थिति और चुनाव के दौरान शांति बनाए रखने को लेकर की जा रही तैयारियों की समीक्षा के लिए वरिष्ठ सीनियर पुलिस अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय वैठक की।
सूत्रों ने बताया कि बैठक में राज्य में केंद्रीय बल के पहुंचने के बाद उनकी तैनाती और उनके असरदार इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इस दौरान सीईओ ने कहा कि केंद्रीय बल को बेकार नहीं रखा जाना चाहिए और उन्हें बिना किसी देरी के सीधे कार्य संबंधी इलाकों में भेजा जाना चाहिए। पर्यवेक्षक केंद्रीय रिजर्व पुलिस बस की गतिविधियों और तैनाती पर करीब से नजर रखेंगे। राज्य पुलिस डेटा में गड़बड़ी के मामलों से जुड़े सत्यापन के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी।
बैठक में चुनाव आयोग की ओर से अतिरिक्त और संयुक्त सीईओ, पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे, डीजी (कानून-व्यवस्था) विनीत गोयल, कोलकाता पुलिस के आयुक सुप्रतिम सरकार, सीआरपीएफ के महानिरीक्ष और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार दूसरे अधिकारी शामिल हुए।
चुनाव की तिथि की घोषणा होने से पहले चुनाव आयोग ने राज्य में दो चरणों में केंद्रीय बलों को तैनात करने का फैसला किया है। चुनाव से पहले केंद्र सशस्त्र पुलिस बल की कुल 480 कंपनियां तैनात की जाएंगी।
गृह मंत्रालय के आधिकारिक संचार के मुताबिक, पहले चरण में एक मार्च तक 240 कंपनियां पश्चिम बंगाल पहुंच जाएंगी। इसमें सीआरपीएफ की 110 कंपनियां, ,सीमा सुरक्षा बल की 55 कंपनियां, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की 27 कंपनियां, सशस्त्र सीमा बल की 27 कंपनियां और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की 21 कंपनियां शामिल होंगी।
वहीं, दूसरे चरण में 10 मार्च तक, राज्य में और 280 कंपनियां तैनात की जाएंगी। इसमें सीआरपीएफ की 120 कंपनियां, बीएसएफ की 65 कंपनियां, आईटीबीपी की 20 कंपनियां और एसएसबी की 19 कंपनियां शामिल होंगी।
चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को बताया है कि जल्दी तैनाती का मकसद वोटिंग से काफी पहले सुरक्षा इंतज़ाम को मजबूत करना और फ्री, फेयर और शांतिपूर्ण चुनाव पक्का करना है।
