नयी दिल्ली 18 फरवरी (वार्ता) कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के प्रमुख कर्नल रोहित चौधरी ने बुधवार को केंद्र सरकार पर सैनिकों की ‘डिसेबिलिटी पेंशन’ (दिव्यांगता पेंशन) को आयकर के दायरे में लाने का आरोप लगाया और इस फैसले को सैन्य मनोबल पर चोट बताया। यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कर्नल चौधरी ने कहा कि हमारे जवान अपनी व्यक्तिगत चिंताओं को त्यागकर देश की रक्षा करते हैं, जिससे नागरिक चैन की नींद सो पाते हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार का यह कदम जवानों के मनोबल को प्रभावित करेगा। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि वर्ष 1961 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के समय से ही सैनिकों की दिव्यांगता पेंशन को आयकर से मुक्त रखा गया था, लेकिन वर्तमान सरकार का नजरिया इसके विपरीत है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि नयी नीति के अनुसार केवल उन्हीं सैनिकों की दिव्यांगता पेंशन कर मुक्त रहेगी जो युद्ध या सेवा के दौरान चोटिल होकर सेवा से बाहर हो चुके हैं। इसके विपरीत, जो सैनिक चोट लगने के बाद भी अपनी सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उनकी पेंशन को आयकर के दायरे में लाया जा रहा है। उन्होंने भाजपा नेतृत्व वाली सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि खुद को राष्ट्रवादी बताने वाली सरकार अब सैनिकों के सम्मान और उनके अधिकारों में कटौती कर रही है। कर्नल चौधरी ने यह भी बताया कि हाल ही में पूर्व सैनिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी चिंताओं से अवगत कराया था। उन्होंने वर्ष 2023 के उच्चतम न्यायालय के एक स्पष्टीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने अदालती रुख के बाद ‘डिसेबिलिटी पेंशन’ का नाम बदलकर ‘दिव्यांगता क्षतिपूर्ति राहत’ कर दिया है, ताकि इसे तकनीकी आधार पर टैक्स के दायरे में लाया जा सके। उन्होंने इसे सैनिकों के साथ अन्याय करार दिया।
इस अवसर पर कर्नल एस.पी. सिंह ने भी सरकार के इस रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सेना किसी भी देश की अंतिम उम्मीद होती है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने वालों के साथ ऐसा व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार सैनिकों के बजट में कटौती कर अपनी अर्थव्यवस्था को सहारा देना चाहती है। कांग्रेस ने सरकार से इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार करने की मांग की है।

