नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट सोमवार, 16 फरवरी को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए तैयार है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ इस संवेदनशील मामले पर विचार करेगी। विवाद का मुख्य कारण हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आया एक वीडियो है, जिसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री को एक विशेष समुदाय के लोगों पर राइफल से निशाना साधते और ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट’ जैसे नारों के साथ दिखाया गया है। वामपंथी दलों (CPI और CPIM) ने इस पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील निजाम पाशा ने अदालत को बताया कि 7 फरवरी 2026 को प्रसारित हुए इस एनिमेटेड वीडियो में अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति नफरत और खुली हिंसा को बढ़ावा दिया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री संवैधानिक पद पर रहते हुए शपथ का उल्लंघन कर रहे हैं और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ डर का माहौल पैदा कर रहे हैं। हालांकि आलोचना के बाद वीडियो को आधिकारिक हैंडल से हटा दिया गया था, लेकिन याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह अभी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि इस मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया जाए और भारतीय न्याय संहिता के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि “चुनाव के समय कई मामले कोर्ट के भीतर लड़े जाते हैं,” फिर भी अदालत इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तारीख तय करने पर सहमत हुई। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी इस मुद्दे पर समर्थन जताया है, जिससे अब सबकी निगाहें कल होने वाली न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं।

