सीहोर: शहर में अवैध कॉलोनियों का जाल अब बुनियादी सुविधाओं की नसों तक पहुंच गया है. ताजा मामला समीपस्थ जमोनिया तालाब से आ रही मुख्य पेयजल पाइपलाइन का है, जिस पर ही कॉलोनाइजर ने प्लाट काट डाले. इतना ही नहीं, कई मकान और दुकानें भी खड़ी कर दी गईं. अब नगर पालिका ने नोटिस थमाकर शासन की अनुमतियां प्रस्तुत करने को कहा है, जानकारी के अनुसार जमोनिया तालाब से शहर की जलापूर्ति के लिए बिछाई गई मुख्य पाइपलाइन पर अतिक्रमण कर प्लॉटिंग की गई. इस मामले में नपा के जबावदेह अधिकारियों का कहना है कि यदि भविष्य में पाइपलाइन में खराबी आती है या मरम्मत की जरूरत पड़ती है, तो भारी समस्या खड़ी हो जाएगी।
जलापूर्ति बाधित होने के साथ-साथ लाखों रुपये की पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंच सकता है. शुक्रवार को सीएमओ सुधीर कुमार के निर्देश पर सहायक यंत्री विजय कोहली और अमला सायलो चौराहा स्थित एक अवैध कालोनी में पहुंचा. सहायक यंत्री की मानें तो निकाय की जलापूर्ति हेतु जमोनिया जलाशय से मण्डी/गंज क्षेत्र की ओर राइजिंग मेन लाईन (मुख्य पाईप लाईन) बिछी हुई है. कालोनाईजर द्वारा अतिक्रमण कर निर्माण कार्य करा लिया गया है जिससे पाईप लाईन से संबंधित किसी भी प्रकार का कार्य किया जाना संभव नहीं है. ऐसे में नगर पालिका द्वारा नोटिस जारी कर कॉलोनाइजर से शासन की स्वीकृतियां मांगी गई हैं. यदि दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते, तो अतिक्रमण हटाने और अवैध निर्माण पर कार्रवाई की बात कही जा रही है. हालांकि शहरवासियों का कहना है कि केवल नोटिस थमाना पर्याप्त नहीं है, जब तक जमीन पर सख्त कार्रवाई न हो.
शहर में अवैध कालोनियों की बाढ़
जिला मुख्यालय और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बिना वैधानिक अनुमति के कॉलोनियां विकसित होने का सिलसिला तेजी से बढ़ा है. न तो विधिवत डायवर्शन, न टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की स्वीकृति और न ही मूलभूत सुविधाओं का प्रावधान—फिर भी प्लॉट धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं. आम नागरिक अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर प्लॉट खरीद रहे हैं, लेकिन बाद में वे कानूनी उलझनों में फंसते हैं. अवैध कालोनी के रहवासी होने के कारण नगरीय निकाय व ग्राम पंचायत द्वारा मूलभूत सुविधाएं प्रदान नहीं की जातीं और न ही बिजली के स्थायी कनेक्शन उन्हें मिल पाते हैं. ऐसी परिस्थितियों में अवैध कालोनी में प्लाट खरीदकर मकान बनाने वाले नागरिक खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं, जबकि कालोनाईजर पूंजी लेने के बाद उनसे वास्ता ही नहीं रखते.
संबंधित विभाग जानबूझकर कर रहा अनदेखी
शहर में कहीं भी अवैध कालोनी एक- दो दिन में नहीं कट जाती. इसमें महीनों समय लगता है, लेकिन जिम्मेदार उदासीन रहते हैं. इस मामले में भी सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब मुख्य पाइपलाइन पर प्लॉट काटे जा रहे थे, तब संबंधित विभाग और अधिकारी क्या कर रहे थे? क्या यह सब उनकी जानकारी में नहीं था, या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई? शहर में अवैध कॉलोनियों का फैलता जाल गंभीर प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है. वहीं स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में पेयजल संकट गहराएगा और नगर की मूलभूत सुविधाएं चरमरा जाएंगी. लोगों ने प्रशासन से मांग की जा रही है कि अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाए.
अनुमतियां दिखाने को कहा है
सायलो चौराहे के समीप जमोनिया तालाब से आ रही पाईपलाईन पर अवैध रूप से निर्माण किए गए हैं. इन सभी 11 अतिक्रमणकारियों को नोटिस देकर उनसे निर्माण संबंधी अनुमतियां दिखाने को कहा गया है. अगर वह अनुमतियां नहीं दिखाते हैं तो हमारे द्वारा आगामी कार्रवाई की जाएगी.
विजय कोहली,
सहायक यंत्री, नपा
